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बिहार: विधायकों का वेतन व भत्ता बढ़ा, अब 1 लाख 35 हजार मिलेगा

विधायकों और विधान पार्षदों का वेतन और भत्ता बढ़ाया गया है। साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन में भी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इससे...

बिहार: विधायकों का वेतन व भत्ता बढ़ा, अब 1 लाख 35 हजार मिलेगा
पटना लाइव हिन्दुस्तान टीमTue, 20 Nov 2018 06:34 PM
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विधायकों और विधान पार्षदों का वेतन और भत्ता बढ़ाया गया है। साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन में भी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव की स्वीकृति मिली। शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव के पारित कराने के बाद नया वेतन लागू होगा। 

वेतन और भत्ता बढ़ाए जाने पर एक विधायक को हर माह अब करीब एक लाख 35 हजार मिलेगा। अभी इन्हें एक लाख आठ हजार प्रति माह मिल रहा है। इसके अलावा वाहन खरीदने के लिए एडवांस के रूप में दस लाख की जगह 15 लाख मिलेंगे। ट्रेन और हवाई जहाज से यात्रा के लिए हर साल दो लाख की जगह अब तीन लाख मिलेंगे। निजी सहायक के लिए 20 हजार की जगह अब 30 हजार मिलेगा। किसी कार्य के संपादन के लिए यात्रा भत्ता भी अलग से विधायकों-विधान पार्षदों को मिलता है। 

पूर्व विधायकों और पूर्व विधान पार्षदों को मिलने वाली न्यूनतम पेंशन को 25 हजार से बढ़ा कर 35 हजार कर दिया गया है। यह पेंशन एक साल विधायक रहने पर मिलेगी। इसके बाद वे जितने साल तक विधायक रहे, उतने वर्ष तक हर साल पेंशन में तीन-तीन हजार रुपये तक वृद्धि होगी। पहले हर साल दो हजार की वृद्धि होती थी।  इसके पहले 2014 और 2011 में इनके वेतन और भत्ते में वृद्धि की गई थी। 

विवि-कॉलेज पेंशनरों को चिकित्सा भत्ता मिलेगा
राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेज से सेवानिवृत पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों को 200 प्रति माह चिकित्सा भत्ता मिलेगा। यह भत्ता एक अगस्त 2014 के प्रभाव से लागू होगा। इसकी भी स्वीकृति कैबिनेट ने दी। वहीं विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में 10463 करोड़ के द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करने की स्वीकृति कैबिनेट ने दी। इनमें 2744 करोड़ स्थापना और 7601 करोड़ वार्षिक योजना के हैं। शेष अन्य मद के लिए हैं। 

इसी प्रकार बिहार राज्य जुबेनाईल जस्टिस एक्ट, 2015 के अंतर्गत मामलों के प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अपर निबंधक, जिला न्यायाधीश कोटि के एक और रिसर्च ऑफिसर कोटि के एक पद के सृजन की स्वीकृति मिली। इस पर खर्च के लिए सालाना 33.22 लाख की मंजूली भी कैबिनेट ने दी।