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बिहार: कागजों में मृत डॉक्टर ने दिया अपने जिंदा होने का सबूत, डीएम-सीएम को मैसेज भेज कहा- मै जिंदा हूं

लाइव हिन्दुस्तान,पूर्वी चंपारणPublished By: Sneha Baluni
Sun, 06 Jun 2021 02:06 PM
बिहार: कागजों में मृत डॉक्टर ने दिया अपने जिंदा होने का सबूत, डीएम-सीएम को मैसेज भेज कहा- मै जिंदा हूं

बिहार के पूर्वी चंपारण का स्वास्थ्य महकमा एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। यहां स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने वाली डॉक्टर अमृता जायसवाल को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं उनके नाम पर वेतन भुगतान से लेकर बीमा की राशि सहित अन्य पैसे हड़पने की कोशिश की गई। इसके बाद उन्होंने डीएम और सिविल सर्जन को फोन और व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर अपने जिंदा होने का सबूत दिया है। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। 

क्या है पूरा मामला
डॉक्टर अमृता जायसवाल छौड़ादानो प्रखंड स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेला बाजार में पदस्थापित थी। 2013 में उन्होंने वीआरएस ले लिया था। लेकिन सेवांत लाभ नहीं लिया था। सेवांत लाभ की राशि में हेरफेर की सूचना पर डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने जांच टीम का गठन किया है। शुरुआती जांच में पता चला है की डॉ. जायसवाल के सेवांत लाभ की फाइल पर धोखे से सिविल सर्जन के स्टेनो मनोज शाही ने हस्ताक्षर करवा लिए। अब जांच कमेटी डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

अविभाजित बिहार में दिया था योगदान
जानकारी के अनुसार डॉ. जायसवाल ने अविभाजित बिहार के स्वास्थ्य विभाग में 13 नवंबर 1990 को योगदान दिया था। उनकी पहली पोस्टिंग हजारीबाग में हुई थी। इसके बाद कई जगहों पर उनकी पोस्टिंग हुई। 2002 को उन्होंने पूर्वी चंपारण के स्वास्थ्य विभाग में अपना योगदान दिया और 2003 में छौड़ादानो प्रखंड के एपीएचसी बेला बाजार में प्रभारी चिकित्सा प्रभारी के रूप में पदस्थापित हुई थीं। बेला एपीएचसी में पदस्थापन के दौरान उन्होंने वीआरएस लगाई जिसे सरकार ने मंजूर कर लिया था।

2013 में वीआरएस लेकर ओमान चली गई थीं
डॉ. जायसवाल 2013 में वीआरएस लेकर ओमान चली गई थीं। मगर उन्हें एलआईसी और जीपीएफ का लाभ नहीं मिला। दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से उन्हें कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और उनकी राशि को हड़पने की कोशिश की गई। इसपर सिविल सर्जन अखिलेश्वर प्रसाद सिंह के हस्ताक्षर थे। जब उन्हें इस बात का पता चला तो उन्होंने डीएम, सिविल सर्जन सहित कई अधिकारियों को मैसेज भेजकर खुद को जीवित बताते हुए मामले की जानकारी दी।

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