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हिंदी न्यूज़ बिहारसीएम नीतीश बोले, जातीय जनगणना पर फिर से विचार करे केंद्र, बीजेपी का जवाब- तकनीकी व व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं

सीएम नीतीश बोले, जातीय जनगणना पर फिर से विचार करे केंद्र, बीजेपी का जवाब- तकनीकी व व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं

पटना, हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Sun, 26 Sep 2021 09:35 PM
सीएम नीतीश बोले, जातीय जनगणना पर फिर से विचार करे केंद्र, बीजेपी का जवाब- तकनीकी व व्यावहारिक तौर पर संभव नहीं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जातिगत जनगणना पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। कहा कि हम लोग शुरू से कह रहे हैं कि जातीय जनगणना होनी चाहिए। बिहार के 10 राजनीतिक दलों ने मिलकर यह मामला उठाया है। विधानसभा से दो बार सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पारित हुआ है। हमारा यही कहना है कि इस मसले पर विचार कर जातिगत जनगणना कराई जाए। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री व भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि तकनीकी व व्यावहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना सम्भव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मगर राज्य चाहे तो वह जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

रविवार को नक्सलवाद पर उच्चस्तरीय बैठक में शामिल होने दिल्ली गए मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जहां तक कोर्ट का सवाल है, वह सोशियो इकोनॉमिक्स कास्ट सेंसस से जुड़ा मामला है। अगर कोई यह कहे कि पिछली बार की सोशियो इकोनॉमिक्स सेंसस की रिपोर्ट सही नहीं है इसलिए जातिगत जनगणना नहीं हो सकती है, यह बात उचित नहीं है। पिछली बार की रिपोर्ट का जातीय जनगणना से कोई संबंध नहीं है। 

वहीं सुशील मोदी ने कहा है कि 1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिलाकर मात्र 5629 जातियां हैं, जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में एकबारगी जातियों की संख्या बढ़कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र, जाति, उपजाति, उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना संभव नहीं हो पाया। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है, लोगों को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए या जो राज्य चाहे तो वहां अपना पक्ष रख सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है, जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न, उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

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