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Hindi News बिहारबिहार के 'चितौड़गढ़' में पहली बार जीता गैर-राजपूत, औरंगाबाद में अभय कुशवाहा ने लालटेन जला दिया

बिहार के 'चितौड़गढ़' में पहली बार जीता गैर-राजपूत, औरंगाबाद में अभय कुशवाहा ने लालटेन जला दिया

मिनी चित्तौड़गढ़ के नाम से मशहूर बिहार की औरंगाबाद लोकसभा सीट पर चुनावी इतिहास में पहली बार किसी गैर राजपूत उम्मीदवार की जीत हुई है। आरजेडी के अभय कुशवाहा ने 2024 में लालटेन जला दिया।

बिहार के 'चितौड़गढ़' में पहली बार जीता गैर-राजपूत, औरंगाबाद में अभय कुशवाहा ने लालटेन जला दिया
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,औरंगाबादWed, 05 Jun 2024 08:07 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार का 'चित्तौड़गढ़' कहे जाने वाली औरंगाबाद सीट पर राजपूतों का गढ़ ध्वस्त हो गया। लालू एवं तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का कुशवाहा फैक्टर काम कर गया। आरजेडी कैंडिडेट अभय कुशवाहा ने बीजेपी के सुशील सिंह को 79 हजार वोटों के अंतर से मात दी। औरंगाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार कोई नॉन राजपूत कैंडिडेट जीता है। इससे पहले यहां से सभी सांसद राजपूत समाज के ही रहे। इसमें भी करीब चार दशक तक दो परिवारों का ही दबदबा रहा। गौर करने वाली बात यह भी है कि आरजेडी की भी औरंगाबाद में यह पहली जीत है।  

लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार की जेडीयू छोड़कर आए अभय कुशवाहा को लालू यादव ने आरजेडी के सिंबल लालटेन पर औरंगाबाद से चुनाव लड़ाया। इस सीट पर कांग्रेस के निखिल कुमार भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन आरजेडी ने महागठबंधन के सीट बंटवारे में औरंगाबाद लोकसभा अपने पास रखी। लालू ने कुशवाहा उम्मीदवार उतारकर औरंगाबाद में कोइरी, यादव और मुस्लिम समीकरण को साधा। इस प्रयोग में वे सफल भी रहे। लोकसभा चुनाव की मतगणना में औरंगाबाद सीट पर हर राउंड में आरजेडी के अभय कुशवाहा बीजेपी के सुशील सिंह से आगे रहे।

औरंगाबाद में आरजेडी ने सुशील सिंह को पांचवी जीत से रोका, अभय कुशवाहा विजयी

औरंगाबाद लोकसभा सीट पर राजपूत और यादव वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके अलावा मुस्लिम, कुशवाहा औ भूमिहार मतदाता भी अधिक हैं। महादलित और अति पिछड़ा वर्ग के वोटर भी यहां मुख्य भूमिका में रहते हैं। 1952 से लेकर 2019 तक हुए सभी लोकसभा चुनाव में यहां से राजपूत जाति से सांसद बने। राजपूतों का दबदबा होने के चलते इसे बिहार का चित्तौड़गढ़ भी कहा जाता है। पहली बार 2024 में गैर राजपूत उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है।
 
13 लोकसभा चुनावों में दो परिवारों का परचम
औरंगाबाद लोकसभा सीट पर बीते चार दशकों से दो परिवारों के ईर्द-गिर्द ही राजनीति घूमती रही। 1989 से छोटे साहब कहे जाने वाले सत्येंद्र नारायण सिन्हा और रामनरेश सिंह उर्फ लुटन सिंह के परिवार के बीच मुकाबला होता रहा। खुद सत्येंद्र नारायण सिन्हा औरंगाबाद से पांच बार सांसद रहे, एक बार उनके बेटे निखिल कुमार और बहू श्यामा सिंह जीतीं। वहीं, लुटन सिंह दो बार और उनके बेटे सुशील सिंह चार बार औरंगाबाद से सांसद रहे। सुशील सिंह के पास इस चुनाव में पांचवीं बार औरंगाबाद से सांसद बनने का मौका था, लेकिन उन्हें अभय कुशवाहा ने हरा दिया।