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6 अक्तूबर, 2020|4:20|IST

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JDU के खिलाफ उम्मीदवार उतारेगी LJP? चिराग पासवान की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक, इस फैसले पर बनी सहमति

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गठबंधन पर कोई भी फैसला लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान लेंगे, लेकिन संसदीय बोर्ड ने राज्य की 143 सीटों पर उम्मीदवार देने का फैसला कर लिया है। संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला चिराग की उपस्थिति में हुआ। इस लिहाज से देखें तो आने वाले चुनाव में भाजपा के लिए सौ सीटें छोड़कर शेष सभी सीटों पर लोजपा अपना उम्मीदवार देगी। 

बैठक से निकलकर राजनीतिक हलकों में आने वाली बातों पर भरोसा करें तो सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि बिहार में जदयू से लोगों में काफी नाराजगी है। चिराग पासवान ने भी अपने संबोधन में कहा कि उनकी पार्टी जदयू के खिलाफ उम्मीदवार देगी। अगर ऐसे में पूर्व सीएम जीतन राम मांझी अपने स्टैंड पर कायम है, तो साफ है कि हम पार्टी का उम्मीदवार लोजपा के साथ ही, जदयू के खिलाफ भी लड़ेगा। 

लोजपा की प्रदेश संसदीय बोर्ड की बैठक के फैसले पर राजनीतिक दलों की निगाहें सोमवार की सुबह से ही लगी थीं। बैठक के बाद पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष राजू तिवारी ने बयान जारी कर बताया कि बोर्ड जल्द राज्य की 143 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम केन्द्रीय कमेटी को सौंप देगा। कहा कि बिहार चुनाव में गठबंधन में क्या तय होता है, वह सभी फैसले लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को तय करने के लिए अधिकृत किया गया है। 

बता दें कि बिहार में सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में जदयू और लोजपा की बीच तनातनी चल रही है। अभी कुछ दिन पहले ही चिराग पासवान ने विज्ञापन छपवाकर अपनी लाइन क्लीयर कर दी थी। आज की बैठक से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फिर निशाना साधते हुए कहा कि मारे गए अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के परिजन को सरकारी नौकरी देने का उनका फैसला 'और कुछ नहीं, बल्कि चुनाव संबंधी घोषणा' है।

लोजपा फरवरी 2005 में हुए बिहार विधानसभा के चुनावों में आरजेडी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी जबकि दोनों क्षेत्रीय दल केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार का हिस्सा थे। एलजेपी ने कांग्रेस से अपना गठबंधन बरकरार रखते हुए आरजेडी के खिलाफ उम्मीदवार उतारे थे। इसकी वजह से राज्य में किसी को भी बहुमत नहीं मिला जिससे लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद का 15 साल का शासन बिहार में खत्म हुआ और कुछ महीनों बाद एक अन्य विधानसभा चुनाव हुआ जिसमें नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला जद (यू) और बीजेपी गठबंधन बहुमत के साथ सत्ता में आया। 

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा समेत तमाम पार्टी नेता एनडीए के तीनों दलों के साथ मिलकर आगामी चुनाव लड़ने पर जोर दे रहे हैं लेकिन सूत्रों ने कहा कि असहजता का भाव आ रहा है खास तौर पर नीतीश कुमार द्वारा राजद के नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश और मांझी से गठजोड़ कर वह अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। 

जेडीयू ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह एलजेपी के साथ सीटों की साझेदारी को लेकर कोई बात नहीं करेगी क्योंकि उसके संबंध परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ हैं।  निर्वाचन आयोग के जल्द ही बिहार विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करने की उम्मीद है। प्रदेश में विधानसभा की 243 सीटों पर अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने की उम्मीद है। 

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