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हिंदी न्यूज़ बिहारइस मामले में यूपी से आगे तो पड़ोसी झारखंड से पीछे है बिहार, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

इस मामले में यूपी से आगे तो पड़ोसी झारखंड से पीछे है बिहार, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

बिहार मिजल्स टीका लगाने के मामले में बेशक उत्तर प्रदेश से आगे और पड़ोसी झारखंड से पीछे है लेकिन भागलपुर मं टीकाकरण राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। यह खुलासा एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट से हुआ है।

इस मामले में यूपी से आगे तो पड़ोसी झारखंड से पीछे है बिहार, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
Sneha Baluniविपिन नागवंशी,भागलपुरSat, 14 May 2022 11:59 AM

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मिजल्स टीका लगाने के मामले में भले ही बिहार पड़ोसी राज्य झारखंड से पीछे और उत्तर प्रदेश से आगे है, लेकिन भागलपुर में मिजल्स टीकाकरण की रफ्तार राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। एनएफएचएस-5 (2019-20) के आंकड़ों के अनुसार, देश के 12 से 23 माह तक के 87.9 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी। वहीं भागलपुर में 12 से 23 माह तक के 91.8 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी। यह राष्ट्रीय स्तर पर हुए टीकाकरण से 3.9 प्रतिशत ज्यादा है। 

एनएफएचएस-4 यानी साल 2015-16 में जिले के 85.4 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगी था। यानी बीते चार सालों में भी जिले में मिजल्स टीकाकरण में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक तरफ जहां बिहार और इसके दोनों पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार में मिजल्स टीकाकरण की दर राष्ट्रीय दर से पीछे है तो वहीं इन तीनों राज्यों में बिहार अपने एक पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से आगे है तो दूसरे पड़ोसी झारखंड से पीछे है। 

एनएफएचएस-5 के अनुसार, बिहार में जहां 12 से 23 माह के 85.7 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी जो कि इस अवधि में उत्तर प्रदेश में हुए टीकाकरण 83.3 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं अपना बिहार राज्य दूसरे पड़ोसी राज्य झारखंड से एक प्रतिशत पीछे है, जहां पर 12 से 23 माह के 86.7 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी। हालांकि तीनों राज्य राष्ट्रीय टीकाकरण की दर 87.9 प्रतिशत से पीछे है।

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चार साल में बिहार ने टीका लगाने में लाई तेजी

अगर हम बीते चार सालों में तीनों राज्यों में हुए मिजल्स टीकाकरण में तेजी की बात करें तो सबसे ज्यादा तेजी बिहार में आयी। बीते चार सालों में (एनएफएचएस-4 से लेकर एनएफएचएस-5 के बीच) जहां बिहार में 12 से 23 माह के 16.7 प्रतिशत ज्यादा बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी तो वहीं उत्तर प्रदेश में इस दौरान 12.5 प्रतिशत ज्यादा बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगायी गयी। जबकि झारखंड में 12 से 23 माह के 3.9 प्रतिशत बच्चों को मिजल्स की पहली डोज लगी। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मिजल्स टीकाकरण के मामले में बीते चार सालों में बिहार ने अपने दोनों पड़ोसी राज्यों की तुलना में ज्यादा संजीदगी दिखाई।

बच्चों के लिए क्यों जरूरी है मिजल्स का टीका

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. मनोज कुमार चौधरी बताते हैं कि खसरा एक जानलेवा बीमारी है। ये बीमारी बच्चों को अपंग बनाने से लेकर उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। ये बीमारी बहुत बड़ी संक्रामक बीमारी है और ये संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से फैलता है। खसरा प्रभावित बच्चों को निमोनिया, दस्त, दिमागी संक्रमण हो सकता है। इस बीमारी का लक्षण तेज बुखार के साथ-साथ त्वचा पर चकत्ता पड़ना, खांसी, नाक और आंख का लाल होना है। ऐसे में खसरा जैसी खतरनाक व संक्रामक बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए मिजल्स टीकाकरण की शुरुआत सरकार द्वारा की गयी। ऐसे में बच्चों को मिजल्स का टीका हर हाल में लगवाना चाहिए।

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