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शादी के मौसम में खतरे में कुंवारे टीचर, जानिए क्या है बिहार का पकड़ौआ ब्याह जिससे खौफ खाते हैं लड़के

शादी के लिए लड़की वाले लड़के के घर जाते हैं। सरकारी नौकरी वाले लड़के आज भी लड़की वालों की पहली पसंद हैं। कोशिश के बाद भी शादी में दहेज का अच्छा खासा देन होता है। इसी से बचने का तरीका है पकड़ौआ ब्याह।

शादी के मौसम में खतरे में कुंवारे टीचर, जानिए क्या है बिहार का पकड़ौआ ब्याह जिससे खौफ खाते हैं लड़के
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाFri, 01 Dec 2023 09:59 PM
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लग्न शुरू होने के साथ बिहार में शादी विवाह का सिलसिला तेज हो गया है। अधिकांश शादियां बैंड बाजे और शहनाई की धुन के बीच हो रही हैं। लेकिन, पकड़ौआ ब्याह की घटनाएं थम नहीं रही हैं। पटना हाई कोर्ट द्वारा जबरन शादी पर बड़े फैसले के बाद वैशाली में एक बीपीएससी शिक्षक की स्कूल से उठाकर पकड़ौआ शादी करा दी गई। इस घटना के बाद बिहार के लाखों कुंवारे शिक्षक शादी ब्याह के मौसम में खतरा महसूस कर रहे हैं।

बिहार में दो मामलों को लेकर पकड़ौआ ब्याह  एक बार फिर चर्चा में है। पटना हाई कोर्ट ने ऐसी शादी के एक दस साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने जबरन कराई गई शादी को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। कहा  कि इसके लिए दोनों पक्षों की रजामंदी आवश्यक है। इस फैसले के बाद वैशाली में शिक्षक की स्कूल से अगवा कर शादी करा दी गयी। बुधवार को पातेपुर के रेपुरा हाई स्कूल के नवनियुक्त शिक्षक गौतम कुमार को कुछ लोगों ने उनके क्लास से अगवा कर लिया और रात में उनकी शादी करवा दी।

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बिहार में पकड़ौआ ब्याह का पुराना इतिहास है। सवाल उठता है कि पकड़ौआ ब्याह की प्रथा क्या है और इसका प्रचलन कैसे शुरू हुआ? दरअसल, आज भी शादी के लिए लड़की वाले लड़के के घर जाते हैं। सरकारी नौकरी वाले लड़के लड़की वालों की पहली पसंद होते हैं। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद शादी में दहेज का अच्छा खासा लेनदेन होता है। अक्सर तिलक दहेज का मामला आसानी से सुलझ जाता है। लेकिन, कई बार लड़के पक्ष द्वारा ज्यादा दहेज मांगे जाने पर उसकी डील पक्की नहीं हो पाती। इसी परिस्थिति में ही लड़की वाले लड़के को जबरन उठा लेते हैं और उसकी शादी कर देते हैं। 

 कुछ मामलों में दहेज की बात नहीं होने पर भी पकड़ौआ विवाह की घटनाएं होती हैं। लड़का योग्य है और उसका भविष्य अच्छा दिख रहा है इसलिए उसकी शादी अपने परिवार या रिश्ते की लड़की से करवाने के उद्येश्य से भी पकड़ौआ शादी कराई जाती है।  ऐसी शादी का सबसे बुरा पहलु यह है कि पकड़ौआ विवाह लड़के के लिए अक्सर कष्टदायक होता है। लड़का अगर आसानी से शादी के लिए तैयार नहीं होता है तो उसकी पिटाई भी की जाती है। टॉर्चर करने के बाद जबरन उसकी शादी कर दी जाती है। 

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पकड़ौआ ब्याह को लेकर आम धारणा यह है कि कानून भले ही इसे  मान्यता नहीं दे लेकिन, समाज शादी हो जाने के बाद इसे नियति मानकर  स्वीकार कर लेता है। कहा जाता है कि जोड़ियां ऊपर वाला बनता है और शादी के तरीके भी उन्हीं के द्वारा तय किए जाते हैं। एक बार शादी हो गई तो फिर खत्म नहीं हो सकती। इसी वजह से पकड़ौआ ब्याह का सिलसिला रुक नहीं रहा। लेकिन कई मामलों में परिवार में अपना लिए जाने के बाद भी लड़की को हमेशा ताना दिया जाता है। ऐसी शादियों से लड़का-लड़की के बीच कभी-कभी संबंध जीवन भर अच्छे नहीं रहते भले हीं बाहर से सबकुछ सामान्य दिखे।

आमतौर पर शादी के बाद दो परिवारों के संबंध अच्छे हो जाते हैं। लेकिन पकड़ौआ शादी के मामले में दोनों परिवारों के बीच कुछ दिनों तक खटास की स्थिति बनी रहती है। लड़की वालों की ओर से मान मनौवल और सामाजिक दबाव के बाद स्थितियां अक्सर सामान्य हो जाती हैं। शुरुआती दिनों में  लड़का लड़की भले ही लग रहें लेकिन कुछ दिनों बाद वे भी साथ आ जाते हैं और परिवार बस जाता है। इन मामलों में समाज और प्रशासन के स्तर पर लड़की पक्ष को ज्यादा सहयोग मिलता है।

लेकिन, पकड़ौआ ब्याह में कुछ अपवाद भी होते हैं। लड़का पक्ष जब अपनी जिद पर अड़ जाता है और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कराने में सक्षम होता है तो ब्याह टूट जाता है। इन मामलों में लड़की की दूसरी शादी भी करनी पड़ती है।  ऐसे में लड़का और लड़की दोनों मनोवैज्ञानिक तौर पर यातना के शिकार हो जाते हैं।

बिहार में सरकारी नौकरी का अभी भी क्रेज है। लड़का पढ़ लिख कर सरकारी जॉब में  आ जाए तो उसकी पुछ बढ़ जाती है। हालांकि, देश में दहेज विरोधी कानून 1961 लागू है। बिहार सरकार भी दहेज विरोधी कानून के तहत सरकारी नौकरी पाने वालों से दहेज नहीं लेने का शपथ लेती है। लेकिन अभी भी 90% शादियां दहेज पर आधारित होती हैं जिनमें गुप्त और विभिन्न तरीके से लेन देन किया जाता है। पढ़े लिखे  समाज में भी दहेज का प्रचलन ज्यादा है।

राज्य में भारी संख्या में बीपीएससी शिक्षक बहाली के बाद पकड़ौआ ब्याह की घटनाएं बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बुधवार को वैशाली की घटना से राज्य के नवनियुक्त कुंवारे शिक्षक अपना वैवाहिक भविष्य खतरे में देख रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग सवा लाख मेल टीचर अभी भी कुंवारे हैं। बीच के दिनों में बिहार में पकड़ौआ विवाह की प्रथा लगभग समाप्त हो गई थी। सरकारी नौकरी का पिटारा खुलने के बाद माना जा रहा है कि ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी होगी।

बिहार में 1980 से 1990 के दशक में पकड़ौआ ब्याह चरम पर था। जानकार बताते हैं कि उस समय किसी युवक की अगर अच्छी नौकरी लगती तो घर वाले सबसे उसका घर से निकलना बंद कर देते थे। प्रायः नौकरी लगने वाली बात काफी दिनों तक छिपाकर रखी जाती थी कि आते जाते कोई शादी के लिएअगवा न कर ले।  नौकरी करने वाले  लड़के को  किसी दोस्त भाई यार की शादी में अकेले नहीं जाने दिया जाता था कि कहीं कोई पकड़कर उसकी जबरन शादी न करवा दे। एक समय ऐसा भी था कि पकड़ौआ ब्याह दबंगों के लिए धंधा था। कुछ खर्च लेकर किसी लड़के को उठाकर किसी लड़की से शादी करवा दी जाती थी। 

बिहार में एक समय ऐसा था जब बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, मोकामा, बाढ़, बख्तियारपुर, मुंगेर, लखीसराय,वैशाली, समस्तीपुर, जहानाबाद जैसे इलाकों में  पकड़ौआ  ब्याह जोरों पर था। पुष्टि नहीं है लेकिन बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में पकड़ौआ ब्याह की प्रथा शुरू होने की बात कही जाती है। कई बार बेहतर योग्यता वाले लड़कों की शादी अयोग्य लड़कियों से करवा दी गयीं। लेकिन, वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल के मामले सामने आने के बाद आम लोगों ने धीरे धीरे इससे इनकार कर दिया। 

पकड़ौआ ब्याह की प्रथा से  बिहार लंबे समय तक जूझ रहा है।  स्टेट क्राइम ब्यूरो के रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2020 में जनवरी से नवंबर महीने के बीच 7,194 पकड़ौआ शादी के मामले दर्ज किए गए।  इससे पहले 2019 में यह आंकड़ा 10,925 था। 2018 में 10,310 और 2017 में 8,972 पकड़ौआ ब्याह के मामले सामने आए।

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