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चार साल बाद छठ के दिन महिला बंदी ने बताया नाम-पता, जमानत मिलने पर गई घर

पटना हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Sun, 05 Dec 2021 08:54 PM
चार साल बाद छठ के दिन महिला बंदी ने बताया नाम-पता, जमानत मिलने पर गई घर

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इसे छठी मैया की कृपा कहें या फिर डॉक्टरों का अथक प्रयास। चार साल से बच्चा चोरी के आरोप में बंद महिला जो कि कुछ बोल नहीं पा रही थी, वह छठ पूजा के दिन बोलने लगी और जेल प्रशासन को उसने अपना नाम और पता भी बताया। उक्त पते पर जांच करने के बाद परिजनों ने उसकी पहचान की और उसका नाम गायत्री बताया। विधिक प्रक्रिया से जमानत मिलने पर रविवार को उक्त महिला बंदी को जमानत पर रिहा किया गया तो परिजनों से मिलकर उसकी आंखें भर आईं। परिजन भी उसे गले से लगाकर खूब रोये। बाद में हंसी-खुशी महिला बंदी अपने परिजनों के साथ वैशाली जिले के राघोपुर चतुरंग चली गई। इसके लिए परिजनों ने जेल प्रशासन का आभार भी व्यक्त किया। 

दरअसल, वर्ष 2017 में वैशाली की यह महिला गायत्री देवी अपने परिजनों के साथ पटना में गंगा स्नान के लिए आई थी। यहां वह अपने परिजनों से बिछुड़ गई। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। इसी बीच 24 जुलाई 2017 को बच्चा चोरी के आरोप में परिजनों से बिछुड़ी महिला गायत्री की बुद्धा कॉलोनी क्षेत्र में जमकर पिटाई की गई। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। जहां से बच्चा चोरी के आरोप में महिला को बेऊर जेल भेज दिया गया। जेल में बेनामी महिला के रूप में उसे दाखिल किया गया था। वह अपना नाम-पता कुछ भी नहीं बता सकी थी। चार साल से उसकी जेल में उचित देखभाल करने के साथ ही डॉक्टरों द्वारा इलाज किया जा रहा था। 

जेल अधीक्षक इं. जितेंद्र कुमार ने बताया कि इसी छठ पूजा के दिन महिला बंदी गायत्री ने अचानक बोलना शुरू कर दिया। पूछताछ में उसने अपना नाम और गांव का पता बताया। उसके बताए पते की वहां जाकर जांच की गई। वहां उसकी चाची अनारकली मिली और उसने जेल में बंद महिला का नाम गायत्री बताते हुए उसके बिछड़ने की पूरी दास्तां बताई। यह भी बताया कि बिछुड़ी पुत्री के वियोग में उसकी मां इस दुनिया से चल बसी जबकि भाई मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया। रविवार को जेल प्रशासन और लॉ फाउंडेशन सह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल अधिवक्ता संतोष कुमार के प्रयास पर उक्त महिला बंदी को जमानत पर छोड़ा गया। उसे अपने साथ ले जाने के लिए उसकी चाची जेल प्रशासन के समक्ष आई थी।

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