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बिहार में विज्ञापन वॉर! आरजेडी के 'धन्यवाद तेजस्वी' के जवाब में जेडीयू का 'मेरा नेता, मेरा अभिमान'

बिहार में आरजेडी और जेडीयू के बीच क्रेडिट की लड़ाई अब अखबारों के विज्ञापन तक पहुंच गई गई है। राजद के धन्यवाद तेजस्वी के जवाब में जदयू ने 'मेरा नेता, मेरा अभियान' शीर्षक से अखबारों में विज्ञापन दिया।

बिहार में विज्ञापन वॉर! आरजेडी के 'धन्यवाद तेजस्वी' के जवाब में जेडीयू का 'मेरा नेता, मेरा अभिमान'
Sandeepलाइव हिन्दुस्तान,पटनाTue, 30 Jan 2024 09:10 AM
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बिहार में महागठबंधन सरकार की विदाई हो चुकी है। और एनडीए की नई सरकार का गठन हो गया है। लेकिन बावजूद इसके आरजेडी और जेडीयू के बीच क्रेडिट वॉर थमती नहीं दिख रही है। पहले ये लड़ाई मुंह जुबानी चल रही थी। लेकिन अब विज्ञापन वॉर में बदल गई है। तमाम अखबारों में राजद और जदयू अपने काम गिना रही है। दो दिन पहले राजद की ओर से 'धन्यवाद तेजस्वी' शीर्षक के नाम से विज्ञापन छपा तो अब जेडीयू की ओर से 'मेरा नेता, मेरा अभिमान' के नाम से विज्ञापन छपा है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी की ओर ये विज्ञापन दिया गया है। 

जदयू के इस विज्ञापन में सीएम नीतीश कुमार की फोटो लगी है। और लिखा है ' मेरा नेता, मेरा अभिमान' और नीतीश कुमार के सतत प्रयासों के लिए आभार जताया गया है। साथ विज्ञापन में नीतीश के कामों गिनाया गया है। विज्ञापन में 7 निश्चय-1 और 7 निश्चय-2 का जिक्र किया गया है। हर घर बिजली, स्वच्छ पानी, हर गांव पक्की सड़क, पक्की नाली, राज्य को 94 लाख गरीब परिवारों को 2-2 लाख की आर्थिक सहायता, गेहूं और चावल के उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि बताई है।

इसके अलावा 2020 में युवाओं को 10 लाख नौकरी और रोजगार देने का वादा, 5 लाख युवाओं को विभिन्न विभागों में नौकरी और स्टार्टअप से रोजगार को बढ़ावा मिलने की बात कही है। साथ ही राज्य का बजट 2005 में 23,800 करोड़ से 2023-24 में 2,61885 लाख करोड़ करने का जिक्र है।

वहीं इससे पहले आरजेडी के 'धन्यवाद तेजस्वी' के विज्ञापन में तेजस्वी के सरकार में रहने के दौरान किए गए कामों को बताया गया था। जिसमें 4 लाख नौकरियां, लाखों नौकरियों की प्रक्रिया, जातिगत सर्वे, 75 फीसदी आरक्षण की सीमा, नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दौरा, शहरों में वॉटर ड्रेनेज सिस्टिम, सड़कों, पुलों, बाईपास का निर्माण, मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना, टूरिज्म, स्पोर्टस और आईटी पॉलिसी, टोला सेवक, विकास मित्र, शिक्षा मित्र जैसी योजनाओं का जिक्र था।

आरजेडी और जेडीयू में अपने-अपने नेता को बेहतर पेश करने की होड़ लगी है। और नीतीश कुमार के महागठबंधन छोड़ बीजेपी के साथ जाने के बाद क्रेडिट वॉर और तेज हो गई है। 

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