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बिहार में बाढ़ से तबाही: रेल पटरी धसने से कटिहार-मालदा रेलवे लाइन कटी

रेल पटरी धसने से कटिहार-मालदा रेल लाइन कटी
रेल पटरी धसने से कटिहार-मालदा रेल लाइन कटी

बिहार में आई भीषण बाढ़ से अब तक 70 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। बिहार और नेपाल में हो रही तेज बारिश के कारण राज्य के 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित जिलों में रेल व सड़क सम्पर्क सेवा बाधित हो गई है। बाढ़ के कारण अबतक सूबे में 74 लोगों की मौत हुई है। आपदा प्रबंधन विभाग ने 56 लोगों की मौत की पुष्टि की है। आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।  इस बीच खबर आ रही है कि बुधवार को सालमारी, कटिहार, मोतिहारी और अररिया में बाढ़ का प्रकोप और बढ़ गया। कटिहार-मालदा रेलखंड मनिया गुमटी के पास रेल लाइन कट गई है। 

दरअसल, बिहार से बंगाल को जोड़ने वाली सड़क टूट गई है। कटिहार- मालदा रूट पर मनिया स्टेशन के पास रेल पटरी धसने से अब एकमात्र मालदा रूट पर भी रेल सेवा की आस खत्म हो गई है। पश्चिम बंगाल के राधिकापुर एवं सिलीगुड़ी रेल रूट पहले से ही पूरी तरह बाधित है। बुधवार की सुबह शहर व आसपास के इलाके में हुई तेज बारिश के कारण मनिया स्टेशन के समीप किलोमीटर संख्या 5-6 पर रेल पटरी धंस गई| ट्रेकमेन द्वारा इसकी सूचना मनिया स्टेशन व कटिहार कंट्रोल को दी गई।

जिस पर मालदा से कटिहार की ओर आ रही हाटे बजारे एक्सप्रेस को रोककर पीछे वापस किया गया। वहीं बुधवार को बारसोई रूट पर चलने वाली एकमात्र कटिहार तेलता सवारी ट्रेन में भारी भीड़ रही| जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्रा ,एसपी सिद्धार्थ मोहन जैन समेत बाढ़ राहत में शामिल टीम के सदस्य ट्रेन में सवार हुए। ट्रेन परिचालन ठप होने से स्टेशन पर अब भी बड़ी संख्या में यात्री समय काट रहे हैं। बुधवार को कटिहार जंक्शन से गुजरने वाली राजधानी, डिब्रुगढ़ चंडीगढ़, लोकमान्य तिलक गुवाहाटी, कैपिटल एक्सप्रेस ,गुवाहाटी जम्मू तवी ,नॉर्थ ईस्ट, सीमांचल, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस आदि ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है |वरीय मंडल अभियंता राजवीर ने बताया कि मनिया स्टेशन के समीप पटरी धंसने की घटना के बाद तत्काल राहत दल को भेजकर उसे दुरूस्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

गंडक का तटबन्ध टूटा,चार पंचायतों में घुसा बाढ़ का पानी

बरौली प्रखंड के परसौनी के पास मंगलवार की देर रात गंडक नदी का तटबन्ध करीब 40 फुट में टूट गया। जिससे बाढ़ का पानी मरिया, करसघाट, सल्लेपुर व काशी टेंगराहीं पंचायतों में प्रवेश कर गया है। बाढ़ का पानी लगातार नए इलाके में फैलता जा रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग अपने माल-मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

गांवों में अफरातफरी मची हुई है। इधर जिले के बैकुंठपुर, सिधवलिया,बरौली , कुचायकोट व सदर प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।अब तक जिले के करीब अस्सी गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।एक हजार से अधिक परिवार बाढ़ से विस्थापित हो चुके हैं।बाढ़ से करीब एक लाख की आबादी प्रभावित हुई है।

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विस्थापित परिवार सड़कों व तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन की ओर से राहत उपलब्ध नहीं कराए जाने से उनके समक्ष भोजन व पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है।गांवों में नाव की कमी से लोगों को परेशानी हो रही है।

कहीं मोबाइल नहीं चल रहा तो कहीं लोगों के पास खाना नहीं पहुंचा
कहीं मोबाइल नहीं चल रहा तो कहीं लोगों के पास खाना नहीं पहुंचा

बलरामपुर में भाई-बहन को पानी में डूबने से मौत

बलरामपुर थाना क्षेत्र के बाहर गांव में मंगलवार की देर शाम पानी में डूबने से भाई बहन की मौत हो गई है ।बताया जाता है कि बघार गांव की प्रीति कुमारी और रोहित कुमार दोनों अपने घर के पास ही थे तथा पानी के किनारे खड़े थे । इसी बीच पानी में पैर फिसलने से दोनों पानी के अंदर चले गए। जब तक लोग उन्हें बचाते तब तक दोनों की दोनों पानी में डूब चुके थे इससे प्रीति और रोहित दोनों की मौत हो गई है। 

बलरामपुर थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि बलरामपुर में पिछले 3 दिनों की तुलना में पानी कम हुआ है। लेकिन सड़क पर अभी भी पानी बाहर आया है बलरामपुर प्रखंड के सभी पंचायतों में बाढ़ का प्रकोप है । एनडीआरएफ टीम बंगाल के टूनीदिग्घी  में कैंप कर बलरामपुर प्रतिदिन आते हैं और बाढ़ पीड़ितों को उचित स्थान पर ले जा रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि टीम के द्वारा 8 वोट चलाया जा रहा है । बाढ़ रहत कार्य भी चलाया जा रहा है ।उन्होंने बताया कि बाढ़ की स्थिति अभी भी वह है लेकिन पानी घट रहा है।  सड़क पर 24 घंटे पहले तीन से चार फीट पानी था जो घटकर एक से डेढ़ फीट पर पहुंच गया है।  इससे लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन स्थिति भयावह बनी हुई है । तेलता ओपी ऑफिस में अभी भी बाढ़ का पानी जमा है। तथा सड़क पर पानी में करंट है। लोग पैदल भी आ जा नहीं सकते हैं।  उन्होंने बताया कि पानी में घटने की रफ्तार ठीक रही तो देर शाम तक सड़क पर से पानी उतर जाएगा । प्रखंड के सभी 13 पंचायतों में बाढ़ का प्रकोप है।  लगभग 200000 से अधिक आबादी प्रभावित है । 

सालमारी में कई जगह पर सड़कें क्षतिग्रस्त, मोबाइल सेवा ठप

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल सालमारी के कार्यपालक अभियंता सच्चिदानंद दास ने बताया बाढ़ की स्थिति भयावह है। अभियंता साइट पर नहीं जा पा रहे हैं। तटबंध तक पहुंचने में परेशानी हो रही है । प्रमंडल कार्यालय से तटबंध  तक पहुंचने वाली सड़कें जगह-जगह पर कट गया है।  जिसके कारण आवागमन बाधित हो गया । उनकी आवास में भी पानी है और किसी प्रकार से अभियंता जीवन काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि सालमारी बाजार को संपर्क करने वाले अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई है।  आवागमन ठप है तटबंध तक पहुंचना बड़ी मुश्किल है।  साथ सी  मोबाइल भी काम नहीं कर रहा है । मोबाइल का बैटरी डिस्चार्ज हो गया है और अभियंताओं से बातचीत भी नहीं हो पा रही है ।

जिला मुख्यालय से मोबाइल से संपर्क टूट गया है।  किसी प्रकार से कभी-कभी बातचीत हो पाती है ,इससे नदियों की जलस्तर की स्थिति भी अवगत नहीं हो रहा है । उन्होंने कहा कि तैयब पर ढ़ेंगड़ा घाट में महानंदा नदी का जलस्तर प्रति घंटे 3 सेंटीमीटर की रफ्तार से घट रही है । लेकिन झौआ में घटने की रफ्तार कम है।  उन्होंने कहा कि पिछले 3 दिनों में महानंदा नदी का जलस्तर मैं 100 सेंटीमीटर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है  । इधर मोबाइल सेवा बाधित होने से जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष को महानंदा नदी के जल स्तर बढ़ने और घटने की जानकारी नहीं मिल पा रही है । झौआ बाहरखाल, आजमनगर धवौल से नदियों के जल स्तर की जानकारी प्राप्त नहीं हो पा रही है । इससे ना तो जिला मुख्यालय को अवगत कराया ज रहा है उन्हें राज मुख्यालय को  करवाया जा रहा है।  प्रखंड में महानंदा नदी के टूटे 5 जगहों पर बांध से निकले पानी सूखे जगह पर पहुंचकर तबाही मचा रहे हैं।  

आजमनगर, हसनगंज ,डंडखोरा, प्राणपुर के उन क्षेत्र में भी पानी पहुंच गए हैं जहां पर पहले पानी नहीं था।  बाढ़ की स्थिति धीरे-धीरे भयावह हो रही है । डंडखोरा के डुमरिया से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की देर रात बाकी पानी स्थिर हो गई । बाढ़ का पानी शहर के निचली इलाके की ओर बढ़ रही है।  जिला प्रशासन  प्रतिदिन बाद राहत कार चला रहे हैंलेकिन बाढ़ की स्थिति इतना भयावह है कि  राहत  लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है । बाढ़ के कारण कदवा बलरामपुर बारसोई आजमनगर से सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है।  लोग ना पैदल जा सकते हैंन  गाड़ी व बाइक से ही । सड़कों पर आवागमन पूरी तरह से   ठप है। रेल से जिला प्रशासन राहत कार्य चला रहें है।  

कई जगह पर लोग तटबंध व घरों के छत पर दिन गुजार रहे हैं । आजमनगर के कदवा के लोगों के पास भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है । डंडखोरा के कंधरपैली  में गांव में लोग बाढ़ के कारण फंसे हुए हैं और गांव से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं । जानकारी के अनुसार अभी तक राहत भी  नहीं पहुंच पाई है । हालांकि जिला प्रशासन बाढ़ राहत कार्य लोगों तक पहुंचाने का कोशिश कर रहे है लेकिन वह बाढ़ की विभीषिका इतना भयावह है कि वह नाकाम साबित हो रहे हैं। सेना लगातार बाढ़ में फंसे लोगों को उचित स्थान पर पहुंचा रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगातार दो दिन बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया। पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जिले का हवाई सर्वेक्षण किया। सीएम ने अापदा प्रबंधन, पथ निर्माण व ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव-सचिवों को निर्देश दिया है कि वे बाढ़ क्षेत्रों में जायें और वहां के नुकसान देखें। आगे क्या करना है, यह बतायें।

अचानक आई बाढ़-सीएम 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। नदियों में पानी का प्रवाह, खासकर महानंदा और कनकई में बहुत तेज है। अनेक गांव में पानी घुसा है। सड़के टूटी हैं। पुलों को भी नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं। एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भोजन का पैकेट गिराए जा रहे हैं। पानी का बहाव, उसका वेग, उसकी मात्र और वर्षा, इन सबके एक साथ होने से फ्लस फ्लड जैसा दृश्य पैदा हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से राज्य में बाढ़ के हालात पर चर्चा की। उन्होंने हर स्थिति से निपटने के लिए केंद्र की तरफ से सहयोग का आश्वासन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालात पर नजदीकी से नजर रखी जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्वीट किया, ‘केंद्र बाढ़ के हालात से निपटने में बिहार सरकार को पूरी मदद का आश्वासन देता है।

एनडीआरएफ मुख्यालय से टीमें राहत व बचाव के लिए बिहार में हैं। सीएम ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की 10 अतिरिक्त कंपनियों को राज्य में तैनात करने की मांग की थी। इसके अलावा राहत अभियान चलाने के लिए भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टर तैनात करने की भी मांग की गई थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अररिया, किशनगंज का बड़ा हिस्सा, पूर्णिया के तीन और कटिहार का एक प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अररिया शहर, फारबिसगंज और किशनगंज में काफी पानी घुसा है। कोई सोच नहीं सकता है कि अररिया और किशनगंज में भी इस तरह से पानी चारों ओर फैलेगा। केंद्र को मैं धन्यवाद देता हूं। हमनें प्रधानमंत्री और गृहमंत्रई से जो अनुरोध किया, उस पर तत्काल अमल हुआ। 

प्रभावित जिले

किशनगंज, अररिया, कटिहार, शिवहर, सुपौल, मधेपुरा के कुछेक इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। सेना को किशनगंज व पूर्णिया के बाद चम्पारण व दरभंगा भेजने की तैयारी है। एनडीआरएफ की 22 टीम को किशनगंज, पूर्णिया, अररिया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण, कटिहार में लगाया गया है। एसडीआरएफ की 15 टीमों को पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, मधेपुरा, शिवहर व मुजफ्फरपुर में तैनात किया गया है।

ट्रेन सेवा पर असर : कटिहार मंडल के किशनगंज व हटवार स्टेशन के बीच पुल संख्या 117 पर पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। पूर्व मध्य रेल प्रशासन ने डिब्रूगढ़, महानंदा, ब्रह्मपुत्र मेल, पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति सहित 42 ट्रेनों को रद्द और 29 ट्रेनों का आंशिक समापन कर दिया। सप्तक्रांति, जननायक एक्स. सहित 15 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा है।

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