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बिहार में फसल सहायता योजना के लिए अबतक 39 लाख किसानों ने किया आवेदन

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरोPublished By: Sunil Abhimanyu
Sun, 06 Sep 2020 09:41 AM
बिहार में फसल सहायता योजना के लिए अबतक 39 लाख किसानों ने किया आवेदन

बिहार सरकार की फसल सहायता योजना किसानों को खूब भा रही है। बाढ़ ने उत्तर बिहार की खेती को चौपट कर दिया। दक्षिण बिहार के किसान भी अब सूखे की आशंका से परेशान हैं। लिहाजा इस साल योजना के तहत आवेदन करने वाले किसानों की संख्या ने नया रिकार्ड बना दिया।

 खास बात यह है कि रैयत से ज्यादा गैर रैयत किसानों की रूचि योजना में दिख रही है। इस वर्ष खरीफ के लिए 39 लाख 24 हजार किसानों ने आवेदन किया है। इसमें गैर रैयत किसानों की संख्या 22.44 लाख है। 

तीन बार तारीख बढ़ाई गई
सहकारिता विभाग ने इस योजना के लिए आवेदन की तारीख तीन बार बढ़ाई। 31 अगस्त को आवेदन की समय सीमा समाप्त हो गई। उसके बाद जो आंकड़ा सामने आया है कि उससे साफ है कि देश में पहली बार किसी राज्य सरकार ने बीमा की जगह फसल सहायता योजना शुरू की तो, किसानों ने इसे हाथो-हाथ लिया। 

गैर रैयत किसानों की संख्या अधिक
योजना के लिए आवेदन करने वाले किसानों में पूर्वी चम्पारण, सारण और मुजफ्फरपुर जिले के किसान सबसे आगे हैं। मुजफ्फरपुर के लगभग सवा दो लाख किसानों ने आवेदन किया है, लेकिन शेष तीन जिलों में साढ़े तीन लाख से अधिक किसानों ने इसके लिए आवेदन किया है। गैर रैयत किसानों के मामले में भी पूर्वी चम्पारण सबसे आगे है। इस जिले के 2.80 लाख गैर रैयत किसानों ने आवेदन किया है, जबकि आवेदन करने वाले रैयत किसानों की संख्या मात्र 74 हजार है। दरभंगा में गैर रैयत 1.72 लाख और रैयत मात्र 64 हजार तथा भोजपुर में गैर रैयत 1.25 लाख और रैयत मात्र 18 हजार किसानों ने आवेदन किया है। 

पिछली फसल में चार लाख किसानों का हुआ चयन
सहकारिता विभाग इस योजना में फसल कटनी को ही सहायता देने का आधार मानता है। पिछली फसल में लगभग 25 लाख किसानों ने आवेदन किया था और सहायता के लिए लगभग चार लाख किसानों का चयन हुआ था। आंकड़े के अनुसार 2201 पंचायतों का चयन फसल सहायता योजना के लिए किया था। 

किसानों को प्रीमियम नहीं देना होता
 राज्य सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा योजना की जगह अपनी फसल सहायता योजना शुरू की थी। इस योजना में किसानों को कोई प्रीमियम नहीं देना होता है। फसल कटनी रिपोर्ट के आधार पर सात साल के औसत उत्पादन के 70 प्रतिशत को आधार मानकार किसानों के उत्पादन की गणना होती है। मानक से एक प्रतिशत भी कम उत्पादन हुआ तो 20 प्रतिशत तक के लिए साढ़े सात हजार और उससे अधिक के लिए दस हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से किसानों को भुगतान होता है। कोई भी किसान अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए सरकारी सहायता ले सकता है। रैयत और गैर रैयत दोनों को इसका लाभ मिलता है।  

योजना एक नजर में 
7500 रुपये प्रति हेक्टेयर मिलेंगे 20 प्रतिशत तक क्षति पर 
10 हजार प्रति हेक्टेयर मिलेंगे 20 प्रतिशत से अधिकतक क्षति पर 
39 लाख किसानों ने किया है आवेदन 
2 हेक्टेयर का ही मिलता है मुआवजा 
 

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