22 doctors notice in fake restoration 30 have already been dismissed - PMCH:फर्जी बहाली में 22 डॉक्टरों को नोटिस, 30 पहले हो चुके हैं बर्खास्त DA Image
21 नवंबर, 2019|9:16|IST

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PMCH:फर्जी बहाली में 22 डॉक्टरों को नोटिस, 30 पहले हो चुके हैं बर्खास्त

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पीएमसीएच में 2017 में संविदा पर तैनात 30 कर्मचारियों की नियुक्ति में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद अब उनकी बहाली से जुड़े पीएमसीएच के 22 डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में डॉक्टरों से 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है। जिन्हें नोटिस किया गया है, उनमें दो प्राचार्य और दो अधीक्षक भी शामिल हैं। इस मामले में बहाल 30 कर्मी पहले ही बर्खास्त किए जा चुके हैं। 

स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव विवेकानंद ठाकुर की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि पीएमसीएच के पत्रांक दिनांक 30 मई 2017 के द्वारा संविदा पर लैब टेक्निशियन, ओटी असिस्टेंट, एक्सरे टेक्निशियन तथा परिधापक के पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था। प्रकाशित विज्ञापन में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव ने अपने पत्र दिनांक 25 जनवरी 2017 में आवश्यक निर्देश दिया था। उसमें पीएमसीएच को अनुपालन करने का निर्देश भी दिया गया था। संविदा पर नियोजन की समय निर्धारित संवर्ग नियमावली, शैक्षिक अर्हता का अनुपालन नहीं किया गया। 

साथ ही मेधा सूची प्रकाशित कर दी गई। इतना ही नहीं, मेधा सूची के आलोक में प्राप्त आपत्तियों का नियमानुकूल निराकरण भी नहीं किया गया। इसके लिए चयन समिति दोषी है। चयन समिति के चेयरमैन पीएमसी के तत्कालीन प्राचार्य प्रो. विजय कुमार गुप्ता (वर्तमान समय में नालंदा  मेडिकल कालेज के प्राचार्य हैं) थे। इसके अलावा पीएमसी के वर्तमान प्राचार्य प्रो. विद्यापति चौधरी, पूर्व प्राचार्य प्रो. एसएन सिन्हा, बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके जायसवाल, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष प्रो. चंद्र किरण, डा. लखींद्र प्रसाद समेत 22 शामिल हैं। 

जब नियोजन अनियमित था तो वेतन कैसे दिया
वर्तमान अधीक्षक प्रो. राजीव रंजन प्रसाद से भी विभाग ने पूछा है कि जब नियोजन अनियमित था तो आपने ऐसे कर्मचारियों को वेतन कैसे दे दिया। लंबे समय के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले में डॉक्टरों को नोटिस दिया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर उक्त संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि क्यों नहीं इस कार्य के लिए आपलोगों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। यदि निर्धारित समय पर जवाब नहीं दिया जाता है तो यह समझा जाएगा कि इस संबंध में आप लोगों को कुछ नहीं कहना है। पत्र मिलने के बाद एक बार फिर पीएमसीएच में हड़कंप मचा हुआ है। ज्यादातर डॉक्टर जवाब देने की तैयारी में हैं।

खबर छपने पर जांच कमेटी गठित हुई थी
बता दें कि इस खबर को आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान में सबसे पहले 27 जनवरी 2019 को प्रकाशित किया था। उसके बाद इस मामले में जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी ने कर्मियों के नियोजन को गलत बताया, उसके बाद सभी कर्मचारी बर्खास्त कर दिए गए थे।

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