Hindi NewsBihar Newsson returned home after 18 years of last rituals in bihar tears flowed from Muzaffarpur to Chapra
2008 में किया था अंतिम संस्कार, 18 साल बाद घर लौटा बेटा; मुजफ्फरपुर से छपरा तक आंसू का सैलाब

2008 में किया था अंतिम संस्कार, 18 साल बाद घर लौटा बेटा; मुजफ्फरपुर से छपरा तक आंसू का सैलाब

संक्षेप:

रोशन छपरा में इधर-उधर भटकता मिला। सेवा कुटीर से जुड़े संवेदनशील लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया। अपने बेटे को जीवित सामने देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने सेवा कुटीर सारण और जिला प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।

Jan 02, 2026 09:48 am ISTSudhir Kumar हिन्दुस्तान, छपरा, नगर प्रतिनिधि
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बिहार के छपरा से हैरतअंगेज खबर है। वर्ष 2008 में जिस बेटे को परिवार ने मृत मानकर हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया था, वही बेटा 18 वर्ष बाद गुरुवार को जब एक युवा के रूप में माता-पिता और भाई के सामने खड़ा हुआ, तो मानो समय ठहर गया। सामाजिक सुरक्षा विभाग के तत्वाधान में संचालित छपरा स्थित सेवा कुटीर परिसर में हुआ यह पुनर्मिलन ऐसा था, जिसने वहां मौजूद हर आंख को नम कर दिया। बिछड़ने की पीड़ा, वर्षों की प्रतीक्षा और अचानक मिली खुशी-इन सभी भावनाओं का सैलाब उस क्षण फूट पड़ा, जब रोशन कुमार अपने परिजनों से गले मिला और फफक-फफक कर रोने लगा। माता-पिता की आंखों से भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

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बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर जिले के गायाघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर निवासी विश्वनाथ साह और रामपरी देवी का पुत्र रोशन मैट्रिक परीक्षा के बाद गलत संगत में पड़ गया। और दोस्तों के साथ दिल्ली निकल गया। रास्ते में वह ट्रेन में अपने साथियों से बिछड़ गया। मंदबुद्धि होने के कारण वह घर वापस नहीं लौट सका। परिजनों ने उसकी खोज में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिता उस समय सरकारी सेवा में थे, उन्होंने हर संभव प्रयास किया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः टूटे मन से परिवार ने रोशन को मृत मान लिया और हिन्दू रीति के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

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इधर, रोशन छपरा में इधर-उधर भटकता मिला। सेवा कुटीर से जुड़े संवेदनशील लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया। भोजपुर के कोईलवर स्थित मानसिक चिकित्सालय में उसका इलाज कराया गया। इलाज के बाद उसकी काउंसलिंग कराई गई, जिसमें उसने अपने घर और पिता का नाम बताया। इसके बाद सेवा कुटीर, जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने मानवीय दृष्टिकोण के साथ समन्वित प्रयास शुरू किए। विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई गई। यह प्रक्रिया लंबी और धैर्यपूर्ण रही, लेकिन उम्मीद नहीं टूटी। अंततः परिजनों का पता चला और वर्षों से बिछड़ा परिवार फिर एक हो सका।

अपने बेटे को जीवित सामने देखकर माता-पिता भावुक हो उठे। उन्होंने सेवा कुटीर सारण और जिला प्रशासन के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है। वर्षों से अधूरी उम्मीद आज पूरी हो गई।इस अवसर पर सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग राहुल कुमार, गृह अधीक्षक राकेश रंजन सिंह, क्षेत्र समन्वयक अरुण कुमार, परामर्शदाता रजनीश कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे। सभी ने इसे सामाजिक सरोकार, संवेदना और जिम्मेदारी का प्रेरक उदाहरण बताया,जहां व्यवस्था ने केवल कागज नहीं, बल्कि टूटे रिश्तों को भी जोड़ा।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar
टीवी मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। क्राइम, पॉलिटिक्स, सामाजिक और प्रशासनिक मामलों की समझ रखते हैं। फिलहाल लाइव हिन्दु्स्तान में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर बिहार के लिए काम करते हैं। इससे पहले ईटीवी न्यूज/News18 में बिहार और झारखंड की पत्रकारिता कर चुके हैं। इंदिरा गांधी नेशनल ओेपन यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में पीजी किया है। और पढ़ें
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