
मैं जिंदा हूं, महिला की गुहार से कई अधिकारी घेरे में; मां का डेथ सर्टिफिकेट बना बेटे ने हड़प ली प्रॉपर्टी
मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से पहले कई चरणों में मीना देवी की कथित ‘मृत्यु’ को सत्यापित किया गया था। रिकार्ड के अनुसार, उनके बड़े बेटे दिलीप कुमार ने दावा किया कि उनकी मां की मौत 28 फरवरी 2024 को हो गई।
बिहार के गया नगर निगम की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। इस बार मामला बेहद चौंकाने वाला है- एक जीवित महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया गया। वार्ड संख्या 17, गुरूद्वारा गोसाईबाग की रहने वाली मीना देवी ने शनिवार को स्वयं सामने आकर कहा कि वह पूरी तरह जीवित हैं, जबकि उनके बड़े पुत्र दिलीप कुमार ने निगम से उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। मीना देवी का कहना है कि यह गंभीर लापरवाही और संभवतः मिलीभगत का मामला है। उन्होंने इसकी शिकायत कोतवाली थाना और नगर निगम में दर्ज कराने की बात कही है।
सत्यापन की पूरी प्रक्रिया ‘झूठ’ पर खड़ी
सबसे हैरानी की बात यह है कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनने से पहले कई चरणों में मीना देवी की कथित ‘मृत्यु’ को सत्यापित किया गया था। रिकार्ड के अनुसार, उनके बड़े बेटे दिलीप कुमार ने दावा किया कि उनकी मां की मौत 28 फरवरी 2024 को गोसाईबाग स्थित उनके घर पर स्वाभाविक रूप से हो गई। 29 मई 2024 को वार्ड 17 की पार्षद सोनी देवी ने अपने लेटर हेड पर प्रमाणित किया कि मीना देवी, जो मूल रूप से आदर्श नगर, रांची की रहने वाली हैं, उनकी मृत्यु 28 फरवरी को हो चुकी है और वह इस तथ्य से परिचित हैं। इसके बाद 5 जून 2024 को दिलीप कुमार ने कार्यपालक दंडाधिकारी सदर से शपथ पत्र बनवाया।
8 जून को नगर निगम कार्यालय में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जमा हुआ। फिर 27 जुलाई को नगर निगम के जांच कर्मी धीरेन्द्र कुमार ने मोहल्ले में जाकर तथाकथित जांच की। इस दौरान दो स्थानीय गवाह बाबूलाल और शंकर प्रसाद ने आधार कार्ड व मोबाइल नंबर देकर पुष्टि की कि मीना देवी की मौत 28 फरवरी को बुढ़ापे के कारण हुई। कागजातों की ब्लॉक स्तर पर पुष्टि के बाद फाइल 11 सितंबर को नगर निगम पहुंची।
सिर्फ दिलीप ही नहीं, सभी पर हो कार्रवाई
मीना देवी के छोटे पुत्र धर्मेंद्र कुमार ने पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि उनके भाई दिलीप ने न सिर्फ जालसाजी कर मां की मृत्यु साबित करवाई, बल्कि संपत्ति हड़पने के इरादे से खुद को तीन भाइयों और एक बहन की जगह इकलौता संतान भी घोषित कर दिया। धर्मेंद्र ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस फर्जी अर्जी को सत्यापित करने वाले वार्ड पार्षद, जांच कर्मी और दोनों गवाहों पर कार्रवाई होगी या नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा- यह अकेले मेरे भाई की गलती नहीं। इसमें कई लोग शामिल हैं, और सब पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर निगम ने कही जांच की बात
जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार संजीव कुमार सिंह ने कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए बनाया गया है। ब्लॉक स्तर पर सत्यापन के बाद ही दस्तावेज निगम में आए थे। उन्होंने कहा कि अब जब मामला सामने आया है, तो जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई अवश्य की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जालसाजी कर बनवाए गए इस प्रमाण पत्र को निरस्त किया जाएगा और दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।





