
महिलाओं की बंपर वोटिंग के निकाले जा रहे मायने, सभी दल जता रहे दावा
आशुतोष कुमार आशुतोष कुमार सीवान। जिले के आठों विधान सभा में इस बार विधानसभा चुनाव में महिलाओं की बंपर वोटिंग ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मतदान के आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में...
आशुतोष कुमार सीवान। जिले के आठों विधान सभा में इस बार विधानसभा चुनाव में महिलाओं की बंपर वोटिंग ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। मतदान के आंकड़े बताते हैं कि कई क्षेत्रों में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। यही कारण है कि अब हर राजनीतिक दल महिलाओं के इस उत्साह को अपने पक्ष में बताने में जुटा है। एनडीए नेताओं का कहना है कि महिलाओं ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों पर भरोसा जताया है। उनका दावा है कि सरकारी योजनाओं में उज्ज्वला योजना, हर घर नल का जल, जीविका दीदियों को दस हजार, पेंश की राशि चार सौ रुपये से ग्यारह सौ करने और महिला सुरक्षा अभियानों ने महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया है।

एनडीए के अनुसार, यह भरोसा ही है जिसने महिलाओं को बड़ी संख्या में उनके पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, महागठबंधन का मानना है कि महिलाओं ने उनकी चुनावी घोषणाओं और सामाजिक न्याय के एजेंडे से प्रभावित होकर वोट डाला है। उनके नेताओं का तर्क है कि महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा जैसी समस्याओं से सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित होती हैं, और उन्होंने बदलाव की उम्मीद में गठबंधन को चुना है। महागठबंधन के नेता कह रहे हैं कि महिलाएं अब सजग मतदाता बन चुकी हैं, वे जानती हैं कि उनके अधिकारों की असली लड़ाई कौन लड़ रहा है। इसी बीच, जन सुराज भी महिलाओं के वोट को अपने पक्ष में मान रहा है। पार्टी का कहना है कि पलायन और बेरोजगारी की समस्या से सबसे अधिक महिलाएं त्रस्त हैं। वे चाहती हैं कि परिवारों को रोज़गार के लिए बाहर न जाना पड़े, और यही भावनात्मक जुड़ाव उन्हें जन सुराज के मिशन के करीब लाया है। जनता अब एनडीए और महागठबंधन को छोड़ बदलाव चाह रही है। इस बार किंगमेकर की भूमिका निभा सकता है महिलाओं का वोट छह नवंबर को विधान सभा चुनाव की वोटिंग संपन्न होने के बाद ही हर बूथ पर महिलाओं की संख्या देख लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। इसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा विधान सभावार महिलाओं की बढ़ी वोटिंग का प्रतिशत जारी किया है। तब से और चर्चा बढ़ गई है। लोगों के साथ-साथ राजनीतिक विशेषज्ञ अब कह रहे हैं कि महिलाओं का वोट इस बार किंगमेकर की भूमिका निभा सकता है। महिलाएं अब केवल पारिवारिक या सामाजिक दबाव में नहीं, बल्कि अपने अनुभव और अपेक्षाओं के आधार पर वोट कर रही हैं। यही कारण है कि महिलाओं की पसंद को लेकर सटीक अनुमान लगाना कठिन हो गया है। मतगणना के बाद स्पष्ट होगा किस दिशा में गया महिलाओं का वोट गौर करने वाली बात है कि जिले में 24.50 लाख कुल मतदाताओं में 14.85 लाख ने वोट किया है। इसमें 7.81 लाख महिला तथा 7.03 लाख पुरुष मतदाताओं ने वोट किया है। इस प्रकार से पुरुष मतदाताओं से करीब 13 प्रतिशत अधिक महिलाओं ने विधान सभा चुनाव में वोट किया। अगर विधान सभावार महिला व परुष मतदाताओं के वोट का आंकड़ा देखेंगे तो हर विधान सभा में महिलाओं ने अधिक वोट की है। फिलहाल, महिलाओं का वोट किस दिशा में गया है, यह 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि महिलाओं की भागीदारी ने इस चुनाव को नई दिशा दी है। इसलिए आने वाले चुनाव में अब हर दल को अपनी राजनीति में महिला मतदाताओं की अहमियत को और गहराई से समझना होगा। महिलाओं की बंपर वोटिंग पर सभी दल कर रहे हैं अपने पक्ष में दावा एनडीए कह रहा है कि विकास के नाम पर महिलाओं ने वोट दी है। महागठबंधन का कहना है कि महिलाएं अधिक वोट हमारी चुनावी घोषणाओं से प्रभावित होकर की है। जबकि जन सुराज का कहना है कि बदलाव और पलायन रोकने को लेकर महिलाओं का वोट हमारे पक्ष में है। इस समय महिलाओं की वोट अबूझ पहेली बन गई है। लेकिन, 14 नवंबर को विधान सभा चुनाव की मतगणना के बाद पता चलेगा कि महिलाओं का वोट किसके पक्ष में है। एक नजर में एसआईआर के पूर्व और बाद में मतदाताओं की संख्या विधान सभा का नाम एसआईआर के पहले मतदाता एसआईआर के बाद मतदाता नए मतदाता जुड़ने के बाद 105 सीवान 330840 307449 318653 106 जीरादेई 289650 270581 275798 107 दरौली सु. 331767 298366 306594 108 रघुनाथपुर 316293 286235 293741 109 दरौंदा 338057 309112 314487 110 बड़हरिया 326865 299221 309621 111 गोरेयाकोठी 352281 321415 330428 112 महाराजगंज 323561 295221 301350 कुल 2609314 2387600 2450672

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