
महिलाओं ने फिर दिखाया दम, वोट में पुरुषों केा पछाड़ा
सीवान जिले में इस बार महिलाओं ने चुनाव में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कुल 24.50 लाख मतदाताओं में से 14.85 लाख ने वोट डाला, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से अधिक रही। महिला वोटिंग प्रतिशत लगभग 67.9% रहा, जो 2020 की तुलना में बढ़ा है। यह महिलाओं की राजनीतिक जागरूकता का संकेत है।
नीरज कुमार पाठक सीवान। जिले की आठ विधानसभा सीटों पर इस बार भी महिलाओं ने लोकतंत्र के उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जिले के कुल 24.50 लाख मतदाताओं में से 14.85 लाख लोगों ने वोट डाला, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से अधिक रही। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि महिला वोटिंग प्रतिशत पुरुषों की तुलना में औसतन 3 से 5 प्रतिशत ज़्यादा रहा। 2020 की तुलना में इस बार महिला मतदाताओं का उत्साह और भी बढ़ा है। यह रुझान न सिर्फ सीवान जिले में देखने को मिला है, लेकिन सीवान की महिलाओं ने विशेष रूप से लोकतंत्र के प्रति अपनी सजगता दिखाई।

लोकतंत्र की असली मिसाल बनीं महिलाएं सीवान जिले में कुल 11.50 लाख महिला मतदाता पंजीकृत थीं, जबकि पुरुष मतदाता 13.05 लाख थे। बावजूद इसके, वोट डालने के समय महिलाओं ने 7.81 लाख वोट डाले, जबकि पुरुषों ने केवल 7.03 लाख। यानी महिला वोटिंग प्रतिशत लगभग 67.9 प्रतिशत और पुरुष वोटिंग 54 फीसदी के करीब रही। यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बूथों तक महिलाओं की लंबी कतारें दिखीं। कई जगहों पर बूथों पर सुबह से ही महिला मतदाता लाइन में खड़ी दिखीं। महिला उत्साह से बढ़ी रौनक रघुनाथपुर और बड़हरिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से ही महिलाओं की भीड़ देखी गई। बड़हरिया की एक महिला मतदाता ने बताया हम हर बार वोट देने आती हैं। अब हम चाहत बानी कि हमर वोट से इलाका बदले। इसी तरह, गोरियाकोठी और महाराजगंज में भी महिला मतदाता रिकॉर्ड संख्या में बाहर निकलीं। स्थानीय प्रशासन ने भी महिलाओं के लिए अलग कतारें और सहायता केंद्र बनाकर माहौल को सहज बनाया। 2020 की तुलना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी 2020 विधानसभा चुनाव में सिवान जिले में औसत मतदान प्रतिशत लगभग 58.1 फीसदी था, जबकि इस बार यह बढ़कर 60.61 फीसदी पहुंच गया। महिला वोटिंग में लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।विशेषज्ञ मानते हैं कि यह महिलाओं की राजनीतिक जागरूकता और सरकारी योजनाओं के असर का परिणाम है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जनधन खाते और स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं में सशक्त मतदाता की भावना को मज़बूत किया है। यही कारण है कि महिलाएं अब हर बार वोट डालने को अपना हक़ और ज़िम्मेदारी दोनों समझ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती वोटिंग अब राजनीतिक दलों की रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है। सीवान, महाराजगंज और गोरियाकोठी जैसे इलाकों में उम्मीदवारों ने महिला समूहों के बीच कई जनसंपर्क अभियान चलाए। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन सीटों पर महिलाओं की वोटिंग ज़्यादा हुई है, वहां महिला एजेंडा चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है। सीवान की आठों विधानसभाओं में महिलाओं ने पुरुषों से आगे निकलकर लोकतंत्र की असली ताकत दिखाई। जहां पुरुषों का औसत मतदान लगभग 54 फीसदी रहा, वहीं महिलाओं का औसत 68 फीसदी के करीब पहुंच गया। यह आंकड़े न केवल लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि आने वाले चुनावों में भी महिला मतदाताओं को केंद्र में लाने का संकेत दे रहे हैं। विधानसभा पुरुष प्रतिशत महिला प्रतिशत कुल वोटिंग प्रतिशत सीवान 54.6 65.4 59.70 जीरादेई 50.4 64.8 57.17 दरौली 50.4 64.5 57.00 रघुनाथपुर 54.9 68.7 61.45 दरौंदा 53.2 66.0 58.75 बड़हरिया 55.9 72.2 63.53 गोरियाकोठी 57.2 72.7 64.50 महाराजगंज 56.6 68.4 62.22

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