
मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी: प्रशासनिक तैयारी और जनउत्साह का संगम
सीवान में विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। प्रशासनिक तैयारी, उत्कृष्ट सुविधाओं और मतदाता जागरूकता के चलते इस बार मतदान को 'लोकतंत्र का उत्सव' बना दिया गया। विशेष सुविधाओं के साथ बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं का ध्यान रखा गया। युवाओं में मतदान का उत्साह देखने को मिला।
सीवान में इस बार के विधानसभा चुनाव में जिलेभर में मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें यह बता रही थीं कि लोकतंत्र का उत्सव अब वास्तव में जनभागीदारी का पर्व बन चुका है। प्रशासनिक तैयारी, बूथों पर उत्कृष्ट सुविधा और मतदाताओं की जागरूकता ने मिलकर इस ऐतिहासिक वृद्धि की कहानी लिखी है।जिला प्रशासन ने इस बार चुनाव को शत-प्रतिशत शांतिपूर्ण और सुविधाजनक बनाने के लिए व्यापक तैयारी की थी। मतदान से पहले जिले के हर प्रखंड में स्वीप कार्यक्रम के तहत जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक और स्कूल-कॉलेजों में वोटिंग अभियानों का आयोजन किया गया।

अधिकारी स्वयं गांवों और वार्डों तक पहुंचे और मतदाताओं से अपील की कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। मतदान केंद्रों की सूची समय से पहले जारी की गई और लोगों को डिजिटल माध्यम से बूथ की जानकारी उपलब्ध कराई गई। पहली बार जिले में लगभग सभी बूथों पर महिला और दिव्यांग सहायता केंद्र बनाए गए। रैंप, व्हीलचेयर, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था ने मतदाताओं को सहज माहौल दिया। बूथों पर बनी त्योहार जैसी रौनक सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी। महिलाओं की भागीदारी इस बार सबसे अधिक रही। बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, जबकि युवाओं में पहली बार वोट देने का जोश स्पष्ट झलक रहा था। शहर से लेकर गांव तक बूथों को रंग-बिरंगे बैनर, फूलमालाओं और ‘सेल्फी प्वाइंट्स’ से सजाया गया था। प्रशासन ने इस बार मतदान को ‘लोकतंत्र का उत्सव’ जैसा रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे मतदाताओं में मतदान को लेकर गर्व और खुशी दोनों बढ़ी। महिलाओं ने बढ़ाई भागीदारी महिला मतदाताओं के उत्साह ने इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। कई केंद्रों पर महिला मतदाताओं की लाइन पुरुषों से लंबी दिखाई दी।रीता देवी, जो सीवान सदर की निवासी हैं, कहती हैं, इस बार बूथ पर बहुत सुविधा थी। महिलाओं के लिए अलग कतार, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था देखकर अच्छा लगा। प्रशासन ने महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखा, इसलिए सभी घरों से महिलाएं निकलीं। गांवों में भी महिला स्व-सहायता समूहों ने मतदान से पहले जनजागरूकता अभियान चलाया। इस कारण ग्रामीण इलाकों में भी मतदान दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। युवाओं का जोश और सोशल मीडिया का असर युवाओं में पहली बार वोट देने का उत्साह देखने लायक था। कॉलेजों में चलाए गए अभियान, पोस्टर और सोशल मीडिया पर प्रशासन के संदेशों ने युवाओं को मतदान के प्रति प्रेरित किया। राकेश कुमार, एक कॉलेज छात्र, बताते हैं, “पहले चुनाव दूर की चीज लगती थी, लेकिन अब हमें महसूस हुआ कि वोट ही बदलाव का माध्यम है। बूथों पर सेल्फी प्वाइंट और स्वागत डेस्क जैसी चीजों ने माहौल को रोचक बना दिया।” युवाओं ने बूथ पर जाकर मतदान करने के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कीं और दूसरों को भी प्रेरित किया। प्रशासन ने इस जोश को दिशा देने के लिए ‘सेल्फी विथ वोट’ प्रतियोगिता भी रखी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान की व्यवस्था इस बार काफी सुदृढ़ रही। जिन इलाकों में पहले बूथ तक पहुंचने में कठिनाई होती थी, वहां सड़क और परिवहन की अस्थायी व्यवस्था की गई।बड़हरिया प्रखंड के किसान सरोज यादव कहते हैं, हमारे गांव में पहले बूथ बहुत दूर था, लेकिन इस बार प्रशासन ने पास में ही केंद्र बना दिया। बूथ तक जाने के लिए सड़क भी ठीक कर दी गई। अधिकारी सुबह से मौजूद थे। इस कारण गांव के हर व्यक्ति ने वोट डाला। इन प्रयासों से ग्रामीण इलाकों में मतदान प्रतिशत में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सुरक्षा और अनुशासन की मिसाल प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि पूरे दिन किसी बड़े व्यवधान की खबर नहीं आई। पुलिस बल और महिला सुरक्षा कर्मी लगातार बूथों की निगरानी में रहे।जिला निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, हर बूथ पर माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए गए थे। संवेदनशील केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे और वेबकास्टिंग की सुविधा दी गई थी। इससे मतदाताओं को पूर्ण सुरक्षा का अनुभव मिला और वे निडर होकर वोट डालने पहुंचे। बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधा इस बार का चुनाव इस मायने में भी ऐतिहासिक रहा कि प्रशासन ने हर वर्ग के मतदाता के लिए सुविधा सुनिश्चित की। बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर और स्वयंसेवक की मदद, दिव्यांगों के लिए विशेष वाहन और रैंप बनाए गए थे। मतदाता कमला देवी,बताती हैं, पहले बूथ तक पहुंचना मुश्किल था, लेकिन इस बार प्रशासन ने घर से ही मुझे पहुंचाया। मैंने सम्मान और जिम्मेदारी दोनों महसूस किए। ऐसी व्यवस्थाओं ने मतदान को समावेशी और मानवीय रूप दिया। मतदान का माहौल बना उदाहरण जिले के सभी मतदान केंद्रों पर प्रशासनिक और पुलिस टीमों की लगातार निगरानी रही। कहीं भी हिंसा या गड़बड़ी की खबर नहीं आई। मतदाता शांतिपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। मतदान के दौरान युवाओं और बच्चों में भी उत्सुकता दिखी। कई जगहों पर बच्चों ने अपने माता-पिता को मतदान के लिए प्रेरित किया। इस सामूहिक प्रयास का परिणाम रहा कि सीवान जिले का औसत मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया। लोकतंत्र के प्रति बढ़ा विश्वास मतदान के बाद लोगों में संतोष और गर्व की भावना स्पष्ट दिखी। लोगों ने कहा कि प्रशासन ने इस बार सचमुच ‘मतदान को आसान और सम्मानजनक’ बना दिया। यही भरोसा आने वाले चुनावों में और मजबूत होगा।जिले के अधिकारी भी मानते हैं कि यह बढ़ा हुआ प्रतिशत प्रशासनिक सफलता ही नहीं, बल्कि जनता की लोकतंत्र में बढ़ती आस्था का भी प्रतीक है। इस बार का चुनाव सीवान जिले के लिए केवल मतदान का आयोजन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रमाण रहा। प्रशासन की सुदृढ़ तैयारी, बूथों पर उत्कृष्ट व्यवस्था और जनता के बढ़े हुए उत्साह ने यह साबित कर दिया कि जब व्यवस्था भरोसेमंद और मतदाता जागरूक हों, तो लोकतंत्र की भागीदारी नई ऊंचाइयों को छूती है। बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास और जिम्मेदारी की गूंज है- जो बताती है कि अब जनता सच में जाग चुकी है।

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