ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक फगुआ गीत : लइका हो गोपाल, लइका हो गोपाल कूद पड़े यमुना में..... गाकर मनाई
रघुनाथपुर के निखती खुर्द शिवमंदिर परिसर में होली के मौके पर गांव के बुजुर्गों ने पारंपरिक फगुआ गीत गाए। इस आयोजन का उद्देश्य होली के पुराने गीतों को जीवित रखना था। भगवान शिव, पार्वती, राम, सीता और कृष्ण से जुड़े गीतों का गायन हुआ। इस अवसर पर युवा भी बुजुर्गों का साथ देते नजर आए।

रघुनाथपुर, एक संवाददाता। सीवान जिले के रघुनाथपुर प्रखंड के निखती खुर्द शिवमंदिर परिसर में होली के पवन मौके पर गांव के बड़े-बुजुर्गों ने होली की पारंपरिक गीत (फगुआ) गाया। गांव देहात से विलुप्त हो रहे होली की पारंपरिक गीतों को जिंदा रखने की एक कोशिश की गई। होली (फगुआ) की शुरुआत लइका हो गोपाल, लइका हो गोपाल कूद पड़े यमुना में से हुई। इसके बाद भगवान शिव और पार्वती से जुड़े गीत होली खेल रहे शिवशंकर गौरा पार्वती संग से हुई। बाबा महेन्द्रनाथ, हरिहरनाथ और वैद्यनाथ को होली गीत के माध्यम से याद किया गया। वहीं भगवान राम और सीता से जुड़े होली गीत, सिया निकले अवधवा की ओर होरिया खेले रामलला व राधा-कृष्ण से जुड़ी होली गीत, राधा घोरअ ना अबीर बगिया में अइले कन्हैया और राधा संग होली खेल रहे घनश्याम आदि पारंपरिक होली गीत को बुजुर्गों ने बड़े दमखम और अपनी बुलंद आवाज में गाया।
भगवान हनुमान से जुड़े होली गीत खेलत फाग परस्पर हेलमेल समेत कई गीत गाये गए। लोगों ने इस दौरान कुछ पारंपरिक जोगीरा भी गाए गए। होली गीत गा रहे लोगों ने बताया कि जो मिठास पहले के गीतों में है, वह आज सुनने को नहीं मिल रहे हैं। ढोलक, झाल, हारमोनियम और झांझ के साथ होली गीत गा रहे बड़े-बुजुर्गों का साथ कुछ युवा भी देते दिखें। होली के इस कार्यक्रम में शंभूनाथ राय, मुरारी राय, विनय राय, मनी भगत, गोधन चौबे, हृदया भगत, ध्रुव भगत, नवल राय, अवध बिहारी राय, वीरेन्द्र राय, मधुसूदन राय, मदन साह, मुन्द्रिका साह गोंड, अशोक राय आदि मौजूद थे।
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