Hindi NewsBihar NewsSiwan NewsTraditional Bulbul Bird Fighting Event Celebrated on Makar Sankranti in Guthni
 मकर संक्रांति पर चिड़ियों की लड़ाई देखने के लिए उमड़े लोग

मकर संक्रांति पर चिड़ियों की लड़ाई देखने के लिए उमड़े लोग

संक्षेप:

गुठनी में मकर संक्रांति के अवसर पर बुलबुल चिड़ियों की लड़ाई का आयोजन किया गया। यह 112 साल पुरानी परंपरा है जिसमें सैकड़ों लोग भाग लेते हैं। चार से छह टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है। इस बार भुआल वर्मा की टीम ने जीत हासिल की। यह आयोजन हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

Jan 16, 2026 12:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीवान
share Share
Follow Us on

गुठनी, एक संवाददाता। प्रखण्ड के मुख्य बाजार में गुरुवार की दोपहर मकर संक्रांति के अवसर पर बुलबुल चिड़ियों की लड़ाई आयेजित की गई। जानकारी के अनुसार, 112 साल से अधिक पुरानी इस परंपरा का निर्वहन ग्रामीण हर्षोल्लास और रोमांच के साथ करते हैं। प्रखण्ड के बलुआ, बसुहारी, खड़ौली, खिरौली, किशनपुरा, गुठनी, सरेया, गोहरुआ, सोनहुला, सोहगरा, टड़वा, सेमाटार, सहित दर्जनों गांवो से सैकड़ो की संख्या में लोग आते हैं। इस दौरान बुलबुल चिड़ियों को एक - एक करके मैदान में उतारा जाता हैं। इसमे कुल चार से छह टीम हिस्सा लेती है। प्रत्येक टीम के पास चार से छह बुलबुल चिड़िया रहती है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इस साल कुल 05 टीमों गयासुद्दीन अंसारी, मोहित कसेरा, चुन्नू हाशमी,मुन्नी लाल,आफताब आलम की टीमो ने हिस्सा लिया। इसमें भुआल वर्मा की टीम ने 08-01 से मैच को जीत लिया। तीन महीने पूर्व से तैयारी में जुट जाते है प्रशिक्षक मकर सक्रांति के पर लगने वाले पारंपरिक बुलबुल चिड़ियों की लड़ाई अपने आप में काफी रोमांचकारी है। इससे जुड़े लोगों की माने तो सितंबर महीने के बाद से बुलबुल चिड़ियों को इसके लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता है। इसके लिए बुलबुल को आटे की गुत्थी, सत्तू की गोलियां, गोंद, पानी, मीठा रस व नियमित उड़ान की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें जीतने वाली चिड़ियों को आयोजक उसके बाद मुक्त कर देता है। जब बुलबुल चिड़ियों को प्रतियोगी मैदान में उतारते हैं। उस समय मौके पर खड़े लोग बुलबुल के हावभाव को देखकर ही जीत का अनुमान लगा लेते हैं। जो चिड़िया सबसे धीरे और सबसे पहले लड़ती है। वह आखिर में विजेता घोषित की जाती है। हिन्दू मुस्लिम एकता का परिचायक है आयोजन प्रखण्ड में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाला बुलबुल चिड़ियों की लडाई हिन्दू मुस्लिम एकता का परिचायक है। इसमे दोनो समुदायों के लोग मिलकर आयोजित करते थे। लोगो की माने तो पहले नदी, दियार, खेल मैदान, तालाब किनारे इसका आयोजन किया जाता था। जहां सुदूर इलाकों के लोग अपना गृहस्थी का सारा काम खत्म करने के बाद जुटते थे। इसमें मुस्लिम समुदाय के लोग बुलबुल चिड़ियों के विशेष प्रशिक्षक माने जाते हैं। वहीं हिन्दू समुदाय उनको इस प्रशिक्षण में पूरा सहयोग करता है।