Hindi NewsBihar NewsSiwan NewsThousands of Devotees Take Holy Dip on Makar Sankranti at Sarayu River
सरयू के नरहन घाट पर लगाई डुबकी, लगा मेला

सरयू के नरहन घाट पर लगाई डुबकी, लगा मेला

संक्षेप:

रघुनाथपुर के नरहन गांव में मकर संक्रांति पर हजारों श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद पूजा-अर्चना की गई। मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें खरीदारी और बच्चों के लिए खेल का आयोजन हुआ। हालांकि, श्रद्धालुओं को स्नान के लिए दूर जाना पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था की कमी रही।

Jan 16, 2026 12:51 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीवान
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रघुनाथपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के नरहन गांव स्थित सरयू नदी तट पर गुरुवार को मकर संक्रांति के पावन मौके पर हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। जिनकी मांगी मन्नत पूरी हुई है, वैसे कई श्रद्धालुओं ने घाट पर ही कोसी भरी और आटा का पीठा चढ़ाया। मकर संक्रांति के अवसर पर नरहन और राजपुर खेल मैदान में मेले का आयोजन किया गया था। इस मेले में दूर-दराज से आए छोटे-बड़े फुटपाथी दुकानदारों ने अपनी दुकानें सजाईं थीं। महिलाओं और पुरुषों ने जमकर खरीदारी की, वहीं बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, जंपिंग गेम्स और खेलकूद के सामानों की व्यवस्था की गई थी।

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जिससे मेले में रौनक बनी रही। हालांकि, इस वर्ष सरयू नदी में इधर के हिस्से में पानी कम होने के कारण श्रद्धालुओं को स्नान के लिए 5 से 6 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित नदी घाट तक जाना पड़ा। गहरे पानी में स्नान करना जोखिम भरा था, लेकिन, श्रद्धालुओं की आस्था के आगे सभी खतरे गौण प्रतीत हुए। स्थानीय प्रशासन की ओर से समुचित कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। न नदी तट पर गोताखोरों की तैनाती की गई और न ही सुरक्षा के अन्य इंतजाम किए गए थे। यह महज संयोग रहा कि स्नान के दौरान कोई भी दुर्घटना नहीं हुई। मेले के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही। पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे लोग जहां-तहां वाहन लेकर प्रवेश करते रहे और जाम की स्थिति बनी रही। इससे श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है यह पर्व आचार्य मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि मकर संक्रांति पर स्नान और दान का विशेष ही महत्व है। इस को पर्व हिंदू धर्म में अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होने का प्रतीक माना जाता है। इधर, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के दौरान नदी के तट पर सुरक्षा व्यवस्था, गोताखोरों की तैनाती, यातायात नियंत्रण व पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पर्व मना सकें।