जंग के मिसाइलों के विस्फोट की आवाज सुनकर प्रवासियों की कांप जा रही रूह
सीवान जिले के दरौली के कार्तिकेय ओझा ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते दुबई में मिसाइलों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। हालांकि, वहां की सरकार के सैनिक इन मिसाइलों को नष्ट कर रहे हैं। स्थानीय भारतीयों में कोई बड़ी क्षति नहीं हुई है और सामान्य जीवन जारी है।

नीरज कुमार पाठक दरौली (सीवान)। अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से दुबई व आसपास के इलाकों में मिसाइलों के दागे जाने से सीवान और इसके आसपास के जिलों के रहनेवाले युवकों में दहशत का माहौल कायम है। रोज- रोज दो- चार मिसाइलों के विस्फोट होने की आवाज आ ही जा रही है लेकिन शुक्र इस बात की है कि इधर से मिसाइलों को आकाश में ही डिफ्यूज कर दिया जा रहा है। इससे कोई बड़ी क्षति नहीं हो रही है। - ये कहना है सीवान जिले के दरौली के कार्तिकेय ओझा का , जो दुबई के जबरअली शहर के पास अपने कैंप में रह रहे हैं।
अपने पिता नंद कुमार ओझा के साथ वाट्सअप कॉल के माध्यम से बातचीत करते हुए कार्तिकेय ने बताया कि पापा, आप चिंता नहीं करें। हम अभी ठीक हैं। केवल मिसाइल चलने की आवाज आ रही है लेकिन यहां की सरकार के सैनिक उसको खत्म कर दे रहे हैं। आसपास में मलबा गिरा है। हम देखे हैं। हमारी कंपनी ने काम पर भी जाने से मना नहीं किया है। हम बराबर काम पर जा रहे हैं। हां, कुछ कंपनियों ने अपने कामगारों को कैंप के अंदर ही रहने के लिए कह दिया है। वे कैंप व उसके आसपास के इलाकों में ही रह रहे हैं। उसने बताया कि दरौली के ही हरनाटार के राजकुमार जी भी उसकी टीम में ही काम करते हैं। उसकी टीम 10 लोगों की है, जो सभी बिहारी ही हैं, इनमें अधिकतर सारण, सीवान और गोपालगंज के ही रहनेवाले हैं। सारण प्रमंडल के ही रहनेवाले लोगों की संख्या भी कम से कम 150- 200 है। इसके अलावा करीब 20 हजार से अधिक भारतीय इस इलाके में रहते हैं। इन बातों की जानकारी देते हुए कार्तिकेय ने बताया कि - मां को समझा दीजिएगा वह बिल्कुल ठीक से रहे। हमारी चिंता नहीं करें। हम ठीक से हैं। एक सवाल के उत्तर में उसने कहा कि अभी हमलोगों को केवल धमाकों की आवाज सुनाई पड़ रही है। अभी पानी, बिजली , इंटरनेट सबकुछ की सुविधा बहाल है। दुकानें भी सामान्य दिनों की तरह ही खुल रही हैं। राशन की कोई किल्लत नहीं है। लोगों का सड़कों पर आना- जाना भी लगा हुआ है। केवल अमरिकी एयर बेस के आसपास ही रहने वाले लोगों को धमाकों की आवाज सुनाई पड़ रही है। इतनी बातों को सुनकर पिता नंदजी ओझा ने कहा कि बाबू, ठीक से रहिएगा। फोन हम करें तो बात कर लीजिएगा इससे मन को बहुत शांति मिल जा रही है।
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