DA Image
29 सितम्बर, 2020|5:16|IST

अगली स्टोरी

सीवान : सुनी छट्ठी मइया मोरी मइया नु हो असरा पूरन होय...गीत से गूंजा शहर और गांव

सीवान : सुनी छट्ठी मइया मोरी मइया नु हो असरा पूरन होय...गीत से गूंजा शहर और गांव

लोक आस्था व सूर्योपासना का चार दिवसीय छठ महापर्व का अनुष्ठान गुरुवार से शुरू हुआ। इस दौरान छठ के पारंपरिक गीतों की धूम मची रही। सुनी छट्ठी मईया मोरी मईया नु हो असरा पूरन होय व जोड़े-जोड़े नारियल ले अइहो पापा, छठ के व्रत हम करबे हो... से गुंजायमान हो रहे घर-आंगन में छठ व्रती नहाय-खाय में लीन रहे। घर-घर में गुरुवार को नहाय- खाय के बाद खरना की तैयारी चलती रही। सूर्य षष्ठी व्रत की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना से होगी। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शुक्रवार को संध्या में मिट्टी के चूल्हा पर खरना का प्रसाद बनाया जायेगा। इस क्रम में साठी के चावल व गुड़ का रसियाव, रोटी व पूड़ी का प्रसाद तैयार कर केला के पत्ता व पीतल की थाली में छठी मईया को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करेंगी। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद परिवार के अन्य सदस्य खरना का प्रसाद ग्रहण करेंगे। व्रती खरना के बाद 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखने के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य शनिवार को देंगी। वहीं उदीयमान सूर्य को रविवार की सुबह अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय छठ का समापन होगा। नहाय-खाय को लेकर घाट व पोखरा पर उमड़ी भीड़ : सूर्योपासना के महापर्व छठ को लेकर नदी-तालाब पर व्रतियों व उनके परिजनों की भीड़ गुरुवार को उमड़ पड़ी। सरयू, गंडक व दाहा नदी के तट पर पड़ने वाले छठ घाट से पानी लेकर व्रतियों ने नहाय-खाय का भोजन तैयार किया। शहर से गुजरने वाली दाहा नदी के अलावा सिसवन, दरौली व रघुनाथपुर में सरयू नदी में स्नान-ध्यान के लिए महिलाएं सुबह से पहुंचने लगी थी। नदी व पोखरा में स्नान-पूजा करने के बाद भोजन में अरवा चावल का भात, चने की दाल व कद्दू की सब्जी बनाई गई। नहाय-खाये में कद्दू की सब्जी की प्रासंगिकता को देखते हुए बाजार में भी कद्दू की बिक्री में तेजी रही। 30 रुपये से लेकर 50-60 रुपये तक की कद्दू बिकी। छठ व्रतियों ने बताया कि चने की दाल अन्य दालों से अधिक शुद्ध होता है, इसलिए छठ पर्व में शुद्धता को देखते हुए विशेषकर चने की दाल व्रती नहाय-खाये के दिन ग्रहण करती हैं।पीतल के बर्तन से अर्घ्य देने की मान्यता : कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी को जल में खड़े होकर छठ व्रती डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी। मान्यता के अनुसार पीतल के बर्तन से ही अर्घ्य देना चाहिए। तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए। छठ पर्व में शुद्धता का ध्यान रखते हुए पूजा का प्रसाद बनाने के लिए लकड़ी से लेकर बर्तन तक को गंगाजल से पवित्र करने की परंपरा रही है। आस्था के इस पर्व में लोगों ने व्रतियों के स्वागत के लिए कई तरह के इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि घाट पर जाते समय लोगों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कई तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Siwan Suni Chhatte Meiya Mori Meiya Nu Ho Asra Puran Hoy The city and village resonated with song