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सीवान के छोरे ने आईएएस परीक्षा में मचाया धमाल

नींद कहा उनकी आंखों में जो धुन के मतवाले हैं, गति की तृष्णा और बढ़ती है जब पैर में पड़ते छाले हैं। दरअसल कवि दिनकर की लिखी यह पंक्ति सीवान के छोरे व दरौली प्रखंड के पुनक गांव के विष्णुदयाल मल्ल के 26 वर्षीय इकलौते संतान आनंद वर्द्धन पर शत-प्रतिशत सटीक बैठ रही है। सिविल सेवा परीक्षा में दो बार लक्ष्य पर नहीं पहुंचने और तीसरी बार में साक्षात्कार तक पहुंचने वाले आनंद न तो इस असफलता से कभी विचलित हुए न लक्ष्य से विमुख। लिहाजा परिणाम उनके सामने है। आईएएस की परीक्षा में चौथे प्रयास में देश में सातवें व बिहार में पहले स्थान पर रहे आनंद वर्द्धन की इस कामयाबी से न उनके परिवार में जश्न व उमंग का माहौल है, बल्कि गांव वाले भी अपने बबुआ को मिली इस कामयाबी से फूले नहीं समा रहे हैं। आनंद वर्द्धन के बड़े पिता श्यामदयाल मल्ल व बड़ी मां सुमित्रा मल्ल का कहना कि भतीजे को मिली सफलता ने देश भर में पुनक गांव का नाम रौशन कर दिया है। इकलौते संतान की इस बड़ी कामयाबी से आनंद के मां-बाप आहृलादित हैं, वहीं गांव व घर में मिठाईयां बांटी जा रही है। चचेरा भाई व बीजेपी नेता उमेश मल्ल बताते हैं कि आनंद जिस मुकाम को पाने के लिए प्रयासरत हैं, उसे पाकर ही दम लिया। उनका कहना है कि आनंद की सफलता से न सिर्फ मल्ल परिवार बल्कि सीवान जिले का मान बढ़ा है। गांव से प्रारंम्भिक शिक्षा पूरी कर पहुंचे गुजरात सिविल सेवा की परीक्षा में देश में सातवां स्थान पाले वाले आनंद वर्द्धन ने गुजरात व दिल्ली में रहकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की। चूंकि पिता एयरफोर्स में कार्यरत हैं, इसलिए उनका एक जगह से दूसरी जगह जाना होता रहता है। यही कारण रहा कि केन्द्रीय विद्यालय भुज गुजरात से दसवीं, एयरफोर्स स्कूल गुजरात से बारहवीं व दिल्ली विश्वविद्यालय से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की। फिर दिल्ली में ही रहकर सिविल सेवा की तैयारी करने लगे। बेटे की कामयाबी से प्रफुल्लित पिता विष्णु मल्ल व मां कृष्णा मल्ल बताती हैं कि उनका बेटा बचपन से मेधावी व अनुशासित रहा है। उसके अंदर हमेशा कुछ अलग हटकर जानने की जिज्ञासा बनी रहती थी। आनंद की सफलता के लिए ईश्वर के प्रति आभार प्रकट किया। टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडर से हैं प्रभावित आनंद वर्द्धन टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडर से प्रभावित हैं। आनंद बताते हैं कि रोजर के व्यक्तित्व का मुझपर इस कदर प्रभाव रहा है कि मैं विपरित परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता। उन्होंने बताया कि हालांकि पहले व दूसरे प्रयास में मैं मुख्य परीक्षा तक ही पहुंच सका जबकि तीसरे प्रयास में साक्षात्कार तक। बावजूद मैंने हिम्मत नहीं हारी। आज इसी का परिणाम है कि चौथे प्रयास में सिविल सेवा की परीक्षा में अंतिम रूप से सफल हो सका, जहां देश में सातवां व बिहार में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। आनंद ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन व अनुशासन के साथ कठिन परिश्रम व कड़ी मेहनत को दिया। विपरित परिस्थिति में भी हताश न होने सलाह सिविल सेवा की परीक्षा में सफल हो देश-दुनिया में सीवान व अपने पैतृक गांव दरौली का नाम रौशन करने वाले आनंद वर्द्धन युवाओं को विपरित परिस्थिति में भी हताश न होने की सलाह देते हैं। निराशा व हताशा का दूर भगा खुद पर विश्वास रखने की बात कहते हैं। उनका कहना है कि प्रतिभागी या अन्य मुझ से सीख लें जिसने तीन बार असफल होने पर भी हिम्मत नहीं हारी और चौथी बार में अपने लक्ष्य का पाकर ही दम लिया। उधर, सीवान से अपने लगाव की प्रशंसा करते हुए आनंद ने बताया कि इसे और विकसित करने की जरूरत है।

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  • Web Title: Siwan's Chhauri performed in IAS examination