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जीविका समूहों का सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक खोलेगा खाता

सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता।विका द्वारा गठित समूहों का सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक में न सिर्फ खाता खोला जायेगा, बल्कि बैंक द्वारा उन्हें ऋण भी उपलब्ध कराया जायेगा। इस योजना को धरातल पर उतारने के...

जीविका समूहों का सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक खोलेगा खाता
हिन्दुस्तान टीम,सीवानWed, 21 Feb 2024 04:00 PM
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सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता।
जिले में जीविका द्वारा गठित समूहों का सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक में न सिर्फ खाता खोला जायेगा, बल्कि बैंक द्वारा उन्हें ऋण भी उपलब्ध कराया जायेगा। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जीविका व बैंक के साथ एमओयू यानि की ज्ञापन समझौता भी किया जा रहा है। इसी के तहत सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक के सभागार में जीविका व सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की समन्वय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को किया गया। बैठक सह कार्यशाला का उदघाटन डीपीएम जीविका कृष्णा कुमार गुप्ता, बैंक के उपाध्यक्ष नागेन्द्र मिश्र व प्रशासी पदाधिकारी आलोक कुमार वर्मा ने संयुक्त रूप से मंगलवार को किया। मौके पर डीपीएम ने बताया कि जिले में वित्तीय समावेशन के तहत 29020 स्वयं सहायता समूहों में 28, 854 समूहों का बचत खाता विभिन्न बैंकों में खोला जा चुका है। समूह के सदस्यों ने अबतक करीब 86 करोड़ रूपये की राशि बचत कर ली है। 24, 397 समूहों को 72 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि परिक्रमी निधि में उपलब्ध कराई गई है। वहीं 1, 789 ग्राम संगठनों को 128 करोड़ा रुपये व 22 संकुल स्तरीय संघों को दो करोड़ 20 लाख रुपये आईसीएफ की राशि प्रदान की जा चुकी है। 27, 356 समूहों को बैंक ऋण के रूप में 1020 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। डीपीएम जीविका ने बताया कि जिले में जीविका दीदियों ने 116 ग्राहक सेवा केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। इन ग्राहक सेवा केन्द्रों के माध्यम से दीदियों को रोजगार का नया अवसर प्राप्त हुआ है।

वहीं सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटविक बैंक के प्रशासी पदाधिकारी आलोक कुमार वर्मा ने बैंक द्वारा दिए जाने वाले ऋण की जानकारी देते हुए बताया कि ऋण राशि समूह बैंक से मियादी ऋण या नगद, उधार ऋण सीमा या दोनों ही जरूरत के हिसाब से प्राप्त कर सकते हैं। आवश्यकता अनुसार, ऋण शेष रहते हुए भी अतिरिक्त ऋण दिया जा सकता है, हालांकि ऐसे ऋण देने के लिए पर्याप्त व उचित आधार का होना आवश्यक है। नगद उधार ऋण सीमा प्रत्येक समूह को पांच वर्षों के लिए न्यूनतम छह लाख तक स्वीकृत की जाती है। इसकी सीमा वार्षिक आधार पर होगी। बताया कि मियादी ऋण देने की प्रक्रिया अलग है। मियादी ऋण तीन प्रकार से दिए जाते हैं। इसमें समूह के क्रेडिट ऋण हिस्ट्री को देखते हुए न्यूनतम छह लाख या छह लाख से अधिक योग्य समूहों को दोबारा ऋण देना बैंक की शाखा सुनिश्चित करती है। प्रशासी पदाधिकारी ने समन्वय बैठक सह कार्यशाला में बैंक द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रकार के ऋण व उनके नियम व तौर-तरीके से विस्तार से जानकारी दी।

मौके पर वित्तीय समावेशन प्रबंधक सजल कुमार, वित्तीय समावेशन नोडल आलोक जुमन, प्रबंधक मानव संसाधन अजीत कुमार, प्रबंधक स्वास्थ्य एवं पोषण जगीर आलम, बैंक के ऋण वसूली कोषांग के वरीय अधिकारी रणजीत कुमार सिंह, अधियाचना पदाधिकारी दुर्गा प्रसाद वर्मा समेत अन्य मौजूद थे।

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