मौसम में बदलाव होने व ठंड कम नहीं होने से तेलहन फसलों पर मार
सीवान में फाल्गुन माह में ठंड कम नहीं हो रही है, जिससे खेती पर विपरीत असर पड़ रहा है। सुबह-शाम कोहरा और कम तापमान आलू, मटर, गोभी और सरसों जैसी फसलों में रोगों के खतरे को बढ़ा रहे हैं। किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि धूप की कमी से फसलों की बढ़वार धीमी हो गई है।

सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। माघ माह के बाद फाल्गुन माह में भी ठंड कम होने का नाम नहीं ले रही। विशेषकर सुबह-शाम के बाद रात बढ़ने के साथ ठंड बढ़ती जा रही है। फाल्गुन मास शुरू होने के साथ पछुआ हवा चलने से ठंड में कनकनी बढ़ गई है। शहरी क्षेत्र से इतर ग्रामीण इलाके में सुबह में कोहरा छाया रह रहा है। इसका असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है। लगातार धूप नहीं निकलने व खेतों में नमी कम नहीं होने से फसलों में प्रकाश संश्लेषण यानि कि फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया धीमी हो गई है। इससे पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।
बताते हैं कि इस मौसम का सीधा असर आलू, मटर, गोभी व सरसों जैसी रबी फसलों पर पड़ रहा है। खेत नमी अधिक रहने व तापमान कम होने से इन फसलों में झुलसा रोग व फफूंद जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बताया जा रहा कि लंबे समय तक पत्तियों पर ओस जमा रहने से फफूंद, सड़न व झुलसा रोग तेजी से फैल सकते हैं। सूरज की रोशनी नहीं मिलने से सरसों व सब्जियों की ग्रोथ धीमी हो गई है। ऐसे में कटाई में देरी हो सकती है। किसानों का कहना है कि खेत में नमी व सुबह के समय कोहरे के कारण देर तक खेतों में काम करना व कीटनाशकों का छिड़काव करना मुश्किल हो गया है। सरसों की फसल में अधिक नमी से फूलों के झड़ने व फली नहीं बनने की समस्या दिख रही है। खेतों में पत्तियों पर पीले व भूरे धब्बे दिखने लगे हैं। आलू की फसल में पत्तियां मुरझाने लगी हैं, जबकि सरसों में फूल झड़ने की आशंका बढ़ गई है। यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ और धूप नहीं निकली, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। यह सोचकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
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