रमजान में एक नेकी के बदले अता किया जाता है 70 नेकी का शबाब
हुसैनगंज, निज संवाददाता। रमज़ान इस्लाम का वह मुकद्दस महीना है, जिसमें अल्लाह तआला ने इंसानियत की रहनुमाई के लिए कुरआन नाज़िल फरमाया। इस पाक महीने में शैतान को कैद कर दिया जाता है, ताकि इंसान छोटी-बड़ी...

हुसैनगंज, निज संवाददाता। रमज़ान इस्लाम का वह मुकद्दस महीना है, जिसमें अल्लाह तआला ने इंसानियत की रहनुमाई के लिए कुरआन नाज़िल फरमाया। इस पाक महीने में शैतान को कैद कर दिया जाता है, ताकि इंसान छोटी-बड़ी हर तरह की बुराइयों और गुनाहों से खुद को दूर रख सके। और फिर उसी सीरत के अनुसार बाकी के ग्यारह महीने नेकी का काम करते हुए गुजारे। हुसैनगंज उत्तर मोहल्ला निवासी मौलाना सज्जाद हुसैन ने बताया कि रमजान के महीने में ज्यादा से ज्यादा वक्त उस रब की इबादत में गुजारना चाहिए जिसने हमें अपनी रहमतों से नवाजा और इसी पाक महीने में पूरी दुनिया की रहनुमाई के लिए कुरान नाजिल किया जिसपर अमल कर हम अपना जीवन सफल बना सकते हैं।
रोज़ा सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि झूठ, चुगली, बुरी नीयत और बदअखलाकी से बचने का पैग़ाम भी देता है। इस महीने में ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत, तिलावत-ए-कुरआन, दुआ और ज़िक्र में गुजारना चाहिए। साथ ही दीन-दुखियों, गरीबों और जरूरतमंदों का ख्याल रखना रमज़ान की अहम जिम्मेदारी है। कहा गया है कि जो इंसान किसी रोज़ेदार को इफ्तार कराता है, उसे भी एक रोज़े के बराबर सवाब मिलता है। रमज़ान हमें पूरी जिंदगी नेकी के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। रमजान के महीने की गई एक नेकी के बदले हमें 70 नेकियों का स्वभ अल्लाह अता करता है। रमज़ान आत्मसंयम, सब्र और नेकी की तालीम देता है तथा इंसान को अपनी सीरत सुधारने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
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