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गोरेयाकोठी बाजार में निकली गई राम-जानकी की बारात

हिन्दुस्तान टीम,सीवानNewswrap
Wed, 08 Dec 2021 07:01 PM
गोरेयाकोठी बाजार में निकली गई राम-जानकी की बारात

धरम-करम

आस्था व उल्लास के साथ गांवों का किया भ्रमण

1936 से निकाली जाती है राम-जानकी की बारात

फोटो संख्या-12 बुधवार को गोरेयाकोठी में निकली भगवान श्रीराम की झांकी।

गोरेयाकोठी। संवाद सूत्र

स्थानीय प्रखंड के गोरेयाकोठी बाजार में बुधवार को भगवान श्रीराम की बारात निकाली गई। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी राम-जानकी विवाह का आयोजन किया गया। बारात पूरे आस्था व उल्लास के साथ गांवों का भ्रमण किया। बारात में श्रीराम के अनुज लक्ष्मण व हनुमान एक ही रथ पर सवार होकर जनक दुलारी सीता से विवाह रचाने के लिए रवाना हो गए। स्थानीय बाजार में पूर्व से निर्मित राम-जानकी विवाह मंडप में रात में स्थानीय महिला, पुरुष, बच्चे, जवान व बुजुर्गों की मौजूदगी में हर्षोल्लास व श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। राम-जानकी विवाह देखने के लिए काफी संख्या में लोग बाजार में इकट्ठा हो गए। पूरा वातावरण मेले जैसा प्रतीत हो रहा था। वक्ताओं ने कहा कि श्रीराम-जानकी का विवाह धरती से पाप मिटाने, पापी का संहार करने व विश्व के कल्याण के लिए हुई है। राम-जानकी विवाह के दर्शन से मानव मस्तिष्क में मर्यादा पुरुषोत्तम व सीता मैया की तप, त्याग, रघुकुल रीत, धैर्य व बहादुरी नजरों के सामने आने लगता है। गोरेयाकोठी बाजार अंतर्गत राम-जानकी विवाह उत्सव का आयोजन वर्ष 1936 से ही अरुण सिंह के पूर्वज करते थे। उनके बाद अरुण सिंह, गुड्डू सिंह, राजू दूबे, उमेश कुमार, राजेश कुमार, विनोद कुमार, अर्जुन कुमार, अमर कुमार व निकेश कुमार आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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राम के नाम से बंधन मुक्त होता है मानव

प्रवचन

प्रखंड़ के गिरधरपुर गांव में चल रहा श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ

महिलाओं ने की मांगलिक गीत के साथ मटकोर की विधि

बड़हरिया। एक संवाददाता

आत्मा और शरीर अलग-अलग है। शरीर का धर्म अलग है। आत्मा निर्लेप है। प्रसिद्ध श्रीराम कथा वाचक अनंतश्री विभूषित डॉ रामा शंकर नाथ दास जी महाराज ने प्रखंड़ के गिरधरपुर गांव में चल रहे श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे थे। कहा कि आत्मा और शरीर अलग-अलग हैं। शरीर का धर्म अलग है, आत्मा निर्लेप है। श्रीराम अगर ईश्वर नहीं होते तो मेरे मन को इतना आकर्षित नहीं करते। निराकार ब्रह्म ही सकार रूप में श्रीराम पधारे हैं। श्रीराम ही परमात्मा हैं। श्रीराम चरित्र का जो श्रवण करता है वह कर्म के बंधनों से मुक्त हो जाता है। उसे श्रीराम की शरण गति प्राप्त हो जाती है। इस अवसर पर मटकोर कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें काफी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने मांगलिक गीत के साथ मटकोर की विधि की। मौके पर विहिप के जिला सह मंत्री परमेश्वर सिंह कुशवाहा, डॉ सत्येद्र कुमार गिरी, उपेंद्र गिरी, अभय भारती, सुजीत कुमार डबलू, अमित कुमार सिंह, युवा कथा वाचक सुशील विनायक सूर्यवंशी मौजूद रहे।

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