1500 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती से खेती-किसानी में नया रंग

Jan 21, 2026 02:57 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीवान
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जिले में पहली बार 1500 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की गई है। किसान गेहूं, सरसों, मसूर और गोभी जैसी फसलों की खेती देसी पद्धति से कर रहे हैं। रासायनिक खाद के स्थान पर देसी खाद का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और फसलें स्वस्थ हो रही हैं।

1500 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती से खेती-किसानी में नया रंग

जिले में पहली बार 1500 एकड़ भूमि में की गई प्राकृतिक खेती ने खेती-किसानी में नया रंग भर दिया है। गेहूं के साथ-साथ सरसों, मसूर व गोभी जैसी फसलों की खेती देसी पद्धति से हुई है। किसानों के अनुसार, प्राकृतिक खेती में सिंचाई का महत्व अधिक है। समय-समय पर हल्की सिंचाई नहीं मिलने पर फसल की बढ़वार रुक जाती थी, जो कि अब नहीं होगी। खेती का स्वरूप बदलने से रासायनिक खाद व कीटनाशक की जगह गोबर, गोमूत्र से बने जीवामृत, घनजीवामृत व देसी घोलों का प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर भी साफ दिख रहा है। फसलें हरी-भरी व कीट-व्याधि के प्रकोप से दूर हैं।

प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों ने बताया कि रासायनिक खेती से साल दर साल मिट्टी की ताकत कम हो रही थी। उपर से अधिक यूरिया व डीएपी के प्रयोग से फसलें कमजोर दिखती थीं। मगर प्राकृतिक खेती में देसी खाद का प्रयोग करने से मिट्टी भुरभुरी हो गई है, अब फिर से खेतों में केंचुए भी दिखने लगे हैं। इससे स्पष्ट है कि मिट्टी में जैविक गतिविधियां फिर से सक्रिय हो रही हैं। बरौली प्रखंड के किसान रामप्रवेश सिंह ने बताया कि पहले हर सप्ताह दवा का छिड़काव करना पड़ता था, तब भी कीड़े पूरी तरह नहीं मरते थे। इस बार जीवामृत और नीमास्त्र के छिड़काव से ही फसल सुरक्षित है। लागत भी आधी रह गई है।

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