
राष्ट्रीयकृत बैंकों में लटक गए ताले : आम आदमी से ले व्यापारी तक परेशान
सीवान में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के गेट पर ताले लगे रहे, जिससे बैंकिंग सेवाएं ठप्प रहीं। एटीएम में नकदी खत्म होने से लोग परेशान हुए। व्यापारियों और छात्रों को वित्तीय लेनदेन में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर शहर समेत पूरे जिले में देखने को मिला। हड़ताल के पहले दिन सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के गेट पर ताले लटके रहे। इससे बैंकिंग कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया। हड़ताल से जहां करोड़ों रुपये का क्लियरेंस प्रभावित हुआ, वहीं आम आदमी से लेकर व्यापारी तक को भारी फजीहत उठानी पड़ी। बैंक शाखाओं में ताले लटकने से कैश जमा-निकासी, ड्राफ्ट बनवाना, सरकारी योजनाओं का सत्यापन व केवाईसी जैसे काम पूरी तरह ठप्प है। हड़ताल को देखते हुए बैंकों में ताला लटके होने से लोग एटीएम का रुख किए ताकि रुपये की निकासी हो सके।
बताया जा रहा कि दोपहर बाद शहर के अधिकांश एटीएम आउट ऑफ कैश हो गए। दोपहर 3 बजे के आस-पास जब जेपी चौक, स्टेशन रोड व अस्पताल रोड स्थित एटीएम की पड़ताल की गई तो बैंक बंद होने के कारण एटीएम में नई नकदी नहीं डाली जा सकी। इसके चलते शाम होते-होते लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक भटकते नजर आए। डिजिटल पेमेंट न करने वाले लोगों व मजदूरों के लिए स्थिति बेहद गंभीर रही। बहरहाल, पांच स्थानों की पड़ताल में अधिकतर एटीएम खाली मिले या आउट ऑफ कैश के बोर्ड लगे थे। इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। व्यापारियों, पेंशनभोगियों व हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को दैनिक लेनदेन के लिए भटकना पड़ा, जबकि सरकारी योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। प्रमुख एटीएम में सुबह से ही लंबी लाइनें लगी थीं। कई जगह सुबह 10 बजे तक कैश खत्म हो गया। लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम भटकते नजर आए। छोटे व्यापारी व दुकानदार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। नकदी की कमी से थोक खरीदारी रुक गई है। डिजिटल लेनदेन पर निर्भरता बढ़ी है। हालांकि छोटे कस्बों में यह भी काम नहीं कर रहा। सामाजिक सुरक्षा पेंशन या बैंक से मिलने वाली सहायता राशि निकालने आए बुजुर्गों को भारी दिक्कत हो रही है क्योंकि वह डिजिटल बैंकिंग नहीं जानते। बहरहाल, केनरा बैंक के समक्ष आयोजित प्रदर्शन में बैंक कर्मियों ने जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के सह-सचिव कलीमुल्लाह अंसारी ने संबोधित करते हुए कहा कि मार्च 2024 में आईबीए के साथ हुए समझौते के बावजूद सरकार पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को ठंडे बस्ते में डाले हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंक कर्मचारी एलआईसी व आरबीआई की तर्ज पर काम करने को तैयार हैं। इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य का विकल्प भी दिया गया है, लेकिन सरकार का आश्वासन नहीं मिलने पर हड़ताल को विवश हैं। विरोध-प्रदर्शन में फरीद हसन, विजय चौबे, राकेश पांडेय, संजय कुमार, सोनू कुमार, केशव प्रसाद, ओम प्रकाश समेत बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। पेंशनभोगी व छात्र परेशान हड़ताल का सबसे दुखद पहलू बैंक काउंटरों पर देखने को मिला, जहां दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्ग सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि निकालने पहुंचे थे। बैंक का ताला देखकर मायूस होकर लौट गए। वहीं, शहर के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने बताया कि महीने का अंत होने के कारण घर से आए पैसे निकालने थे, लेकिन एटीएम और बैंक दोनों ने साथ नहीं दिया। हॉस्टल में रहने वाले छात्र मेस का भुगतान, हॉस्टल फीस या दैनिक खर्च के लिए पैसे निकालने में असमर्थ दिखे। वहीं, बैंक बंद होने से विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान नहीं हो सका। मनरेगा की मजदूरी से लेकर अन्य सब्सिडी वाले लेनदेन अटके रहे। इससे गरीब तबके की दैनिक जरूरतों पर सीधा असर पड़ा। व्यापारिक गतिविधियों पर लगा ब्रेक स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, बैंक बंदी से आरटीजीएस व चेक क्लीयरेंस रुक गया है। थोक विक्रेताओं ने बताया कि पेमेंट नहीं होने से बाहर से आने वाले माल की सप्लाई चेन टूट गई है। व्यापारियों ने बताया कि एक दिन की हड़ताल से बाजार को उबरने में तीन दिन लगते हैं।

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