Siwan News पहली बारिश से खेतों में लौटी रौनक, मक्का समेत खरीफ फसलों की बुआई में जुटे किसान
Siwan News रघुनाथपुर में पुनर्वसु नक्षत्र के पहले तीन दिनों में हुई मानसूनी बारिश ने किसानों में उम्मीद की किरण जगाई है। बारिश के बाद किसानों ने फसलों की बुआई शुरू कर दी है। धान की रोपनी के लिए भी तैयारियां चल रही हैं और मजदूरों की भी आवश्यकता है।

Siwan News रघुनाथपुर, एक संवाददाता। पुनर्वसु नक्षत्र के पहले, दूसरे और तीसरे दिन हुई मानसूनी बारिश ने जिले के किसानों के चेहरों पर उम्मीद की नई किरण जगा दी है। सोमवार की रात हुई अच्छी बारिश से ही खेतों में पर्याप्त नमी आ गई, जिसके बाद मंगलवार की सुबह से किसान मक्का, अरहर, ज्वार, बाजरा और उड़द जैसी खरीफ फसलों की बुआई में जुट गए। वहीं मंगलवार और बुधवार को भी जिले में बारिश की फुहार हुई। पिछले कई दिनों से आर्द्रा नक्षत्र में बारिश नहीं होने के कारण खरीफ की बुआई का कार्य पूरी तरह प्रभावित था और किसान मौसम की बेरुखी से चिंतित थे।
फसलों की बुआई का कार्य
जिले में इस साल 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्के की खेती का लक्ष्य निर्धारित है। बारिश के बाद अब किसानों ने तेजी से खेतों में काम शुरू कर दिया है। ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की गूंज रहे आवाज से गांवों के खेत गुलजार हो उठे हैं। किसान समय पर बुआई पूरी करने में जुटे हैं ताकि फसल का बेहतर उत्पादन मिल सके। किसानों का कहना है कि आर्द्रा नक्षत्र के दौरान एक भी दिन अच्छी बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई लगातार पिछड़ रही थी। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ने लगी थी। हालांकि, पुनर्वसु नक्षत्र की शुरुआत में हुई बारिश ने हालात बदल दिए हैं। आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो अगले एक सप्ताह से 10 दिनों के भीतर खरीफ फसलों की बुआई लगभग पूरी होने की उम्मीद है।
धान की रोपनी और मजदूरों की आवश्यकता
बुधवार को दुकानों पर किसान मक्का, अरहर आदि के बीज खरीदते दिखें। इधर, धान की खेती करने वाले किसानों के लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है। जिले में करीब 25 प्रतिशत किसानों के धान के बिचड़े रोपनी के लिए तैयार हो चुके हैं, वहीं अगले सात से दस दिनों में अधिकांश किसानों के बिचड़े तैयार हो जाएंगे। खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही तो एक-दो दिनों के भीतर धान की रोपनी भी शुरू होने की संभावना है। जिले के कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर हुई बारिश खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित होती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों की नमी का पूरा लाभ उठाते हुए समय पर बुआई और रोपाई का कार्य पूरा करें, ताकि बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
बंगाल से मजदूरों का आगमन
धान की रोपनी शुरू करने के लिए जिले किसान तैयारी में जुट गए हैं। लोकल मजदूर तक रोपनी करेंगे ही, पश्चिम बंगाल से भी मजदूर पहुंचने लगे हैं। बड़े-बड़े किसान इन्हीं मजदूरों से रोपनी कराते हैं। ये मजदूर लोकल मजदूरों से सस्ते पड़ते हैं। जिले में 85 से 89 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी होनी है। इस साल मानसून बेहतर नहीं रहने की आशंका को लेकर किसानों द्वारा बिचड़ा कम ही डाला गया है। तीखी धूप और गर्मी की वजह से इस साल बिचड़ा भी बेहतर नहीं है। 40 से 50 फीसदी बिचड़ा मार खा गए हैं। ऐसे में किसान मक्का-अरहर आदि फसलों की बुआई अधिक करेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार किसानों को अनुदान की व्यवस्था करे।
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