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संगति के अनुकूल बनती है मनुष्य की प्रवृत्ति : ज्योति किशोरी

सिसवन, एक संवाददाता। राम वह है जिसे प्रत्येक मनुष्य हर रिश्ते पर देखना चाहता है। पुत्र हो तो राम जैसा, पति हो तो राम जैसा, राजा हो तो राम जैसा कहने का भाव है राम को सब प्राप्त करना चाहते हैं। ये...

संगति के अनुकूल बनती है मनुष्य की प्रवृत्ति : ज्योति किशोरी
हिन्दुस्तान टीम,सीवानWed, 21 Feb 2024 04:00 PM
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सिसवन, एक संवाददाता। राम वह है जिसे प्रत्येक मनुष्य हर रिश्ते पर देखना चाहता है। पुत्र हो तो राम जैसा, पति हो तो राम जैसा, राजा हो तो राम जैसा कहने का भाव है राम को सब प्राप्त करना चाहते हैं। ये बातें प्रखंड के कचनार गांव के उद्ववाहू बाबा मठ में चल रहे श्रीराम कथा के छठवें दिन वृदावन से आई रामकथा बाचक ज्योति किशोरी ने कही। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का ध्येय भी यही होना चाहिए की राम हमारे जीवन में आ जाएं। रामचरितमानस की कथा हमें मनुष्य बनना सीखाती है। मानस की कथा को जो अपने जीवन में उतार लेता है उनका जीवन राम जैसा बन जाता है। कहने का भाव जो कार्य एक मनुष्य शरीर कर सकता है वह कोई पशु पक्षी नहीं कर सकता। इसलिए राम की कथा को सुनने और जानने की आवश्यकता है। किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व, विकास और जीवन में संगति बहुत महत्व रखती है। कहा भी जाता है कि इंसान की जैसी संगति होती है वैसी ही उसकी प्रकृति, प्रवृत्ति व स्थिति होती है। मनुष्य जोगियों के साथ जोगी व भोगियों के साथ भोगी बन जाता है। विशेष कर बाल अवस्था और किशोर अवस्था में व्यक्ति जिसके साथ रहता है उसके जीवन पर उसका व्यापक असर दिखता है। इसलिए माता-पिता को सत्संगति का, अच्छे विचारों का बीज बच्चों के मन में बचपन से बोया जाना चाहिए। संगति से ही व्यक्ति को संस्कार प्राप्त होता है।

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