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नहाय-खाय के साथ शुरू होगा जिउतिया पर्व आज से।

नहाय-खाय के साथ शुरू होगा जिउतिया पर्व आज से।

संक्षेप: हसनपुरा में जिउतिया पर्व शनिवार से शुरू होगा। माताएं रविवार को अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। इस पर्व का संबंध महाभारत काल से है जब भगवान कृष्ण ने उत्तरा की अजन्मी संतान को...

Sat, 13 Sep 2025 02:17 PMNewswrap हिन्दुस्तान, सीवान
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हसनपुरा, एक संवाददाता। आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर नहाय-खाय के साथ शनिवार को जिउतिया का पर्व शुरू होगा। अपनी संतान की सुख-समृद्धि व लंबी आयु की कामना के लिए माताएं रविवार को जिउतिया पर्व पर निर्जला व्रत रखेंगी। जिउतिया को जीवित पुत्रिका (जीमूतवाहन) पर्व भी कहा जाता है। दो दिवसीय अनुष्ठान में व्रत करने वाली माताएं शनिवार को स्नान-ध्यान कर भगवान की आराधना करेंगी। वहीं रात में सरगही का सेवन करेंगी। उसके बाद व्रतियों का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा। रविवार को पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर माताएं अपने पुत्र के दीर्घायु की कामना करेंगी। सोमवार को सुबह करीब 6:25 बजे से पारन के साथ यह अनुष्ठान समाप्त होगा।

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हालांकि जिउतिया व्रत को लेकर शुक्रवार से ही पूजन सामग्री व फल-फूल की खरीदारी शुरू हो गई। खरीदारी को लेकर दुकानों में दिन-भर भीड़ लगी रही। महिलाएं मान्यता के अनुसार पूजा सामग्री की खरीदरी की। वहीं सनातन धर्मावलंबियों में इस व्रत का विशेष महत्व है। आचार्य राजू मिश्रा के अनुसार जीवित पुत्रिका व्रत की कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। महाभारत युद्ध में अपने पिता की मृत्यु के बाद अश्वथामा बहुत ही नाराज था। उसके अंदर बदले की आग तीव्र थी। इस कारण उसने पांडवों के शिविर में घुसकर द्रौपदी के पांचों संतान को सोते अवस्था में पांच पांडव समझकर मार डाला था। उसके इस अपराध के कारण अर्जुन ने उसे बंदी बना लिया और उसकी दिव्य मणि छीन ली। इसके फलस्वरूप अश्वथामा ने उत्तरा की अजन्मी संतान को गर्भ में मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया। इसे निष्फल करना नामुमकिन था। उत्तरा की संतान का जन्म लेना आवश्यक था। इस कारण भगवान कृष्ण ने अपने सभी पुण्यों का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसे गर्भ में ही पुनः जीवित किया। गर्भ में मरकर जीवित होने के कारण उसका नाम जीवित पुत्रिका पड़ा। आगे जाकर यही राजा परीक्षित बना। तब ही से इस व्रत को किया जाता है।