दो सालो में तेजी से बढ़ा प्रवासी पक्षियों की संख्या
गुठनी और दरौली के नदी इलाकों में पिछले 2 सालों में प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्थानीय लोग खुश हैं, क्योंकि ये पक्षी विदेशी प्रजातियों के हैं। मोटे अनाज की खेती, साफ वातावरण और शिकार का न होना इसके मुख्य कारण हैं। हालांकि, प्रशासन की अनुपस्थिति पक्षियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।

गुठनी, एक संवाददाता। दरौली और गुठनी के प्रखंड मुख्यालयों के सटे नदी इलाकों और दियारा इलाको में प्रवासी पक्षियों की संख्या विगत 2 सालों में तेजी से बढ़ी है। इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि दियारा इलाकों में प्रवासीय पक्षियों के कलरव से वहां रहने वाले लोग भी खुश हैं। जबकि इनमें आने वाले कई पंछियों का झुंड विदेशी प्रजातियों का है। उनमें से कई पंछियों की पहचान स्थानीय ग्रामीण भी नहीं कर पा रहे हैं। वहां रहने वाले लोगों की माने तो मोटे अनाज की खेती, शिकार का ना होना, साफ सुथरा वातावरण, नदी इलाकों में शिकार का मिलना और लोगों की सजगता शामिल है।
हालांकि स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं होने से उन पर असर भी पड़ सकता है। सीओ विद्या भूषण भारती ने बताया कि अगर इस तरह की बात सामने आती है तो इसकी लिखित सूचना जिला मुख्यालय और इससे जुड़े अधिकारियों को भेजी जाएगी। हम इस मामले में खुद जानकारी और निगरानी रखेंगे। दियारा और नदी इलाके बने प्रवासी पक्षियों का बसेरा -----------------------------------------------------------------स्थानीय लोगो की माने तो सरयू नदी के किनारे की भौगोलिक स्थिति काफी सुदृढ़ है। इसीलिए यहा प्रवासीय पक्षियों का हुजूम लगा रहता था। जिसमे आने वाले प्रमुख पक्षियों में साइबेरियन क्राउन, साइबेरियन हंस, टिकवा, सराग, लालसर, गैरी, कौआल, धनेश, धारिल, स्पेनिश पपीहा का झुण्ड हमेशा दियारा और नदी इलाके की हरियाली में कलरव करते हुए नजर आ रहे हैं। जो बिगत कुछ सालों से नही इनका झुण्ड ही आता है और नही इनका कलरव ही सुनाई पड़ता है। पर्यावरण असंतुलन के अलावा शिकार भी नहीं आने का मुख्य कारण ------------------------------------------पर्यावरण असंतुलन के अलावा शिकारियों के कहर को लोग इसके लिए दोषी मानते थे। हालांकि पक्षियों की सुरक्षा के लिए आसपास के लोग काफी चौकस भी रहते हैं। गांव व आसपास के लोग पक्षियों की सुरक्षा को भी लेकर काफी तत्पर है। शिकारियों को वे नदी और आसपास के इलाकों भी नहीं फटकने देते थे। बावजूद चोरी-छिपे शिकारी पक्षियों को निशाना बना ही लेते थे। लोगो का कहना है कि स्थानीय प्रशासन प्रवासीयपक्षियों की सुरक्षा व देख भाल के लिए कोई ब्यवस्था नही किया। क्या कहते हैं सीओ ============== सीओ विद्याभूषण भारती ने बताया की इसकी जानकारी अब तक हमको नहीं है। अगर स्थानीय लोगों द्वारा इसकी जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी।
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