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 संपर्क की भाषा बनी हिन्दी नहीं बन सकी रोजगार की भाषा

संपर्क की भाषा बनी हिन्दी नहीं बन सकी रोजगार की भाषा

संक्षेप:

सीवान, हिंदुस्तान संवाददाता।इस्लामिया कालेज में भी मना हिन्दी दिवस फोटो 17 - हिन्दी दिवस के अवसर पर जेड ए इस्लामिया कालेज में उपस्थित वक्ता। सीवान। हिन्दी दिवस के अवसर पर जेड ए इस्लामिया कालेज के...

Sep 15, 2025 01:56 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सीवान
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सीवान, हिंदुस्तान संवाददाता। शहर के दारोगा प्रसाद राय डिग्री कॉलेज में हिन्दी दिवस के अवसर पर जनवादी लेखक संघ के तत्वावधान में वर्तमान समय और साहित्य विषयक संगोष्ठी व कवि गोष्ठी का आयोजन रविवार को किया गया। इस मौके पर आलेख पाठ करते हुए अरुण कुमार सिंह ने वर्तमान समय के हालात का विशद चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इन हालातों से साहित्य व साहित्यकारों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। अधिवक्ता रविन्द्र सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार चुनाव में धांधली कर सत्ता में बनी रहना चाहती है जो तानाशाही की आहट है। साहित्यकार अपनी विचारधारा से जनता में जागरुकता पैदा कर अधिकारों के प्रति सचेत करता है।

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युगल किशोर दूबे ने कहा कि हिंदी भाईचारा और सम्पर्क की भाषा तो बनी लेकिन रोजगार की भाषा नहीं बन पायी। प्रो. हारुन शैलेन्द्र ने हिन्दी पर विशद रूप में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिन्दी व उर्दू गंगा जमुनी तहजीब की भाषा है। आज शासक वर्ग भाषा के नाम पर समाज में जहर घोल रहा है। संगोष्ठी में प्रो. संदीप यादव,राम नरेश सिंह, धर्मेंद्र कुमार आदि ने अपनी बात रखी। वहीं दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी हुई। अधिवक्ता अरशद अली सल्लू ने अपनी रचना दिल की जज़्बात है हिंदी भाषा, सभी की चाहत है हिंदी मेरी आंखों की वसीयत है हिंदी भाषा, पढ़कर सुनाया। मोहम्मद गुलाम कासिफ ने अपनी रचना सुनाई जमाने हाल की हकीकत क्या लिखूं फकत में हूं एक कलम। गुलाम सरवर हाशमी ने हिन्दी दिवस पर प्रस्तुत नज़्म ने वाहवाही लूटी इस वतन की शान है हिंदी मेरी, एकता की जान है हिंदी मेरी नाम रौशन है इसी से प्यार का मुल्क की पहचान है हिंदी मेरी।अध्यक्षता कर रहे जलेस के जिलाध्यक्ष शायर कमर सीवानी ने हिन्दी दिवस को अपनी रचनाओं से जीवंत बना दिया। उन्होंने जो डगमगाए राह में उसे सम्भाल दो,सारे जहां को हिंदी के सांचे में ढाल दो, सुनाया। लाइची हरिराही, विक्रमा पंडित विवैकी ने अपनी रचनाओं से समा बांध दिया। मंच संचालन मार्कंडेय व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. उपेन्द्र नाथ यादव ने किया। कन्हैया चौधरी, सुशील कुमार व विभूति राम आदि उपस्थित थे।