
जमीन नहीं होने से सब्जी मंडी व फल मंडी का बाजार असुरक्षित
नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी जमीन की कमी के कारण कई विकास योजनाएं ठप्प हैं। सब्जी मंडी, कचरा निस्तारण और पिंक टॉयलेट जैसी योजनाएं फाइलों में हैं। जनसंख्या बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं नहीं बढ़ रही हैं। नगर परिषद ने जमीन की खोज के लिए कई प्रयास किए, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं मिला।
नगर परिषद क्षेत्र में सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने से शहरी विकास से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक बड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन ठप्प पड़ा है। सब्जी मंडी, फलमंडी व मछली मंडी के लिए मंडी के हिसाब से पर्याप्त जगह नहीं होने से जहां ये बाजार लग रहे हैं, वहां जाम व खरीद-बिक्री के दौरान खरीदार से लेकर विक्रेता तक परेशान रहते हैं। वहीं, कचरा निस्तारण प्लान, पिंक टॉयलेट, कचरा डंपिंग प्लांट, हाट बाजार जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं वर्षों से फाइलों में दबी हुई हैं। नगर परिषद के वर्तमान व पूर्व बोर्ड की बैठकों में शहर के समग्र विकास को लेकर रोड मैप तो तैयार किया गया, लेकिन जमीन की उपलब्धता न होने से योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं।
नगर परिषद सूत्रों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का विस्तार अपेक्षित गति से नहीं हो सका है। सब्जी मंडी के अभाव में सड़क किनारे अव्यवस्थित ढंग से सब्जियों की बिक्री हो रही है। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। वहीं, कचरा निस्तारण व कचरा डंपिंग प्लांट के लिए जमीन नहीं मिलने से कचरा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाई है। शहर में कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगे रहते हैं। इससे स्वच्छता व स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। महिलाओं की सुविधा व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिंक टॉयलेट योजना लाई गई थी, लेकिन इसके लिए भी उपयुक्त सरकारी जमीन चिह्नित नहीं हो सकी। इसी तरह बड़े शहरों की माफिक हाट-बाजार की योजना भी जमीन के अभाव में अधर में लटकी है, जबकि इससे छोटे व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ मिल सकता था। नगर परिषद का मानना है कि यदि ये योजनाएं लागू हो जाएं तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं, शहरी व्यवस्था में सुधार होगा। क्या कहती मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद नगर परिषद की मुख्य पार्षद सेम्पी देवी व उप मुख्य पार्षद किरण गुप्ता ने बताया कि सरकारी जमीन की तलाश के लिए जिला प्रशासन से कई बार पत्राचार किया गया। राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर भूमि चिन्हित करने का प्रयास भी हुआ, लेकिन अब तक ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। कुछ स्थानों पर जमीन विवादित है तो कहीं अतिक्रमण की समस्या आड़े आ रही है। इसकारण, बोर्ड की बैठकों में लिए गए कई बड़े निर्णय जमीन नहीं मिलने से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

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