सीवान में रसोई गैस की किल्लत से लकड़ी और कोयले की कीमत में लगी आग
सीवान में रसोई गैस की लगातार कमी के कारण लोग लकड़ी और कोयले से खाना बनाने को मजबूर हैं। इससे लकड़ी और कोयले के दाम में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही खाद्य वस्तुओं जैसे सरसों का तेल, चावल और मसालों के दाम भी बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

(सीवान से नीरज कुमार पाठक)। जिले में रसोई गैस की लगातार किल्लत बनी हुई है। गैस एजेंसियों व गोदामों पर सुबह से लेकर शाम तक लोगों की लाइनें लग रही हैं। बावजूद इसके उन्हें समय से गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में जब लोग चूल्हे पर लकड़ी व कोयले से भोजना बनाना शुरू किए तो लकड़ी व कोयले पर भी महंगाई की आंच लगनी शुरू हो गई। लकड़ी के दाम जहां दो से तीन रुपए बढ़ गए तो कोयले के दामों में भी तीन से चार रुपए इजाफा हो गए हैं। जिसके कारण लोगों को अर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
शहर के लकड़ी व्यवसायी ने बताया कि पहले जलावन की लकड़ी नौ रुपए प्रति किलो मिलता था तो 11 से 12 रुपए बेचा जाता था। अब जो व्यापारी लकड़ी देते थे, वे ही 12 रुपए दे रहे हैं। दाम बढ़ने के कारण अब खुदरा में 15 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है। पिछले एक महीने से जब लकड़ी की डिमांड बढ़ी तो भी पहले के दाम में लकड़ी देने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में लकड़ी की डिमांड न के बराबर रहता था। लेकिन इस वर्ष गर्मी के मौसम में गैस की किल्लत के कारण इसकी मांग बढ़ गई है। जिससे दामों में इजाफा हुआ है। वहीं, व्यवसायी सुरेश्वर ने बताया कि एक महीने से कोयले के दाम में बढ़ोतरी हुई है। पहले 18 रुपए कोयला बिकता था। लेकिन, इधर गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण कोयले की मांग बढ़ी है। इससे दाम भी चढ़ गए हैं। अब कोयला 18 से 25 रुपए प्रति किलो बेचा जा रहा है। खाड़ी देश से लौटे प्रवासियों को नहीं मिल रहा काम, बढ़ी मुश्किलें सीवान। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध से खाड़ी देश में रहने वाले सैकड़ों प्रवासी मजदूरों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया है। स्थिति ऐसी है कि प्रवासी प्रतिदिन बजने वाले सायरन व बम की तेज धमाकों के बीच एक-एक दिन काटना किसी मुसीबत से कम नहीं लग रहा है। हाल के दिनों में खाड़ी देश बहरीन से लौटे बसंतपुर के युवक ने बताया कि विभिन्न शहरों में प्रतिदिन होने वाले बमबारी के चलते उन्हें महीनों से बैठकर गुजारा करना पड़ रहा था। वे पिछले दो वर्षों से दिल्ली में रहकर पाइप फीटर का कार्य कर अपना और परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। सरकार के तरफ से नहीं मिली सहायता दूसरे प्रदेशों से नौकरी व रोजगार छोड़ लौटने वाले किसी भी प्रवासियों को सहायता के नाम पर सरकार व प्रशासन के तरफ से कुछ नहीं मिला है। लौटने वाले सभी प्रवासी मजदूर फिलहाल यूं ही बैठकर गुजारा कर रहे हैं। सभी के चेहरे पर युद्ध के चलते नौकरी जाने व आने वाले दिनों में परिवार चलाने में परेशानियों का सामना करने का सिकन दिखाई दे रहा है। प्रवासियों का कहना है कि युद्ध समाप्त नहीं हुआ तो उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सहायता दिलाने के लिए अब तक उनके पास कोई भी सरकारी मुलाजिम नहीं पहुंचा है। चावल व मसाला के दाम में भी बढ़ोत्तरी, काजू भी हुआ महंगा सीवान। कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने का असर अब स्थानीय बाजार पर दिखने लगा है। कई खाद्य दुकानों के दाम में वृद्धि लगातार जारी है। सबसे अधिक वृद्धि सरसों तेल और रिफाइंड के दाम में हुई है। सरसों तेल प्रतिलीटर 10 से 15 रुपए और रिफाइंड 20 से 25 रुपए प्रति लीटर वृद्धि के साथ बिक रहा है। यह वृद्धि जंग की तपिश के बीच एक माह के बाद हुई है। किराना व्यवसायी सुमन कुमार ने बताया कि एक माह पहले सरसों तेल 15 केजी यानि एक टीन की कीमत 2200 रुपए के करीब थी। अभी इसका रेट 2550-2600 रुपए हो गया है। वहीं, 750 एमएल वाला 20 पैकेट का रिफाइंड का कार्टन एक माह पूर्व 2400-2500 रुपए था। इस समय यह 2900 रुपए में मिल रहा है। रिफाइन का कच्चा तेल विदेशों से आता है। इसकी ढुलाई बढ़ने से यह स्थिति हुई है। चावल के रेट में लगातार हो रही वृद्धि बाजारों में चावल के रेट में भी लगातार वृद्धि हो रही है। बासमती या बड़े दाने के चावल को छोड़कर अन्य चावल का ही रेट बढ़ा है। जिसमें सोनम, हाफ ब्वायल, उसना और अरवा के अन्य चावल में 05 से 10 रुपए तक की वृद्धि एक माह में हुई है। थोक व्यवसायी अनिल कुमार ने बताया कि महंगे चावल के रेट नहीं बढ़े हैं। लेकिन, आम वर्ग में उपयोग होनेवाले 40 से लेकर 70 रुपए किलो तक बिकने वाले चावल में दाम में लगातार थोड़ी-थोड़ी वृद्धि हो रही है। पिछले एक माह में अगर मसाला की बात करें तो धनिया के रेट में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। एक माह पूर्व 110 रुपए किलो बिकने वाला धनिया इस समय 135-140 रुपए किलो बिक रहा है। इसके अलावा हल्दी, लाल मिर्चा, गोलमरीज व जीरा के रेट में 5 से 10 रुपए प्रति किलो ही वृद्धि हुई है। वहीं, रहर के दाल में भी 10 से लेकर 20 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई है। वैसे अन्य मसालों का रेट फिलहाल स्थिर है। ड्राईफ्रूट्स के मामले में काजू के रेट में प्रति किलोग्राम 100 रुपए की वृद्धि हुई है। जबकि, अच्छी क्वालिटी के पिस्ता व बादामगिरि के दाम में भी आंशिक वृद्धि हुई है। वहीं, किशमिश और मखाना का दाम अभी स्थिर ही है।
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