
जिले में पॉप्लर के 21 हजार पौधे लगाकर लाई जाएगी हरियाली
सीवान में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग 21 हजार पॉप्लर के पौधे लगाने की योजना बना रहा है। इससे हरियाली सूचकांक में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मजबूती आएगी। पॉप्लर पेड़ तेजी से बढ़ते हैं और लकड़ी उद्योग में उच्च मांग है। किसान 10 रुपये प्रति पौधे की सुरक्षित राशि पर आवेदन कर सकते हैं।
सीवान, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। जिले में कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग जिले में 21 हजार पॉप्लर के पौधे लगाने की तैयारी कर चुका है। इससे आने वाले वर्षों में जिले के हरियाली सूचकांक में बढ़ोतरी के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। बता दें कि पॉप्लर पेड़ अपनी तेज वृद्धि, कम समय में तैयार होने और लकड़ी उद्योग में उच्च मांग के लिए जाना जाता है। कृषि वानिकी मॉडल में इसे फसलों के साथ आसानी से उगाया जा सकता है। यही वजह है कि सरकार अब किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
वन विभाग अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि यदि किसान इस मॉडल को अपनाते हैं, तो कृषि से होने वाली आय में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। किसानों के लिए वन विभाग का बड़ा अवसर जिन किसानों के पास खाली या बंजर जमीन है, वे इस योजना का लाभ उठाकर अपनी भूमि को उपयोगी बना सकते हैं। इसको लेकर आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की गई है। इच्छुक किसान सीधे जिले के वन विभाग कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। पौधों की आपूर्ति विभाग द्वारा की जाएगी। ताकि किसानों को गुणवत्ता की चिंता न रहे। मात्र 10 रुपये प्रति पौधे की सुरक्षित राशि तीन वर्षों के लिए जमा कर पॉप्लर के पौधे किसान प्राप्त करेंगे। तीन वर्ष के बाद सुरक्षित जमा राशि की 50 प्रतिशत वापस कर दी जाएगी। इससे अधिक उत्तरजीवता होने पर 60 रूपये प्रति पौधा प्रोत्साहन राशि अलग से दी जाएगी। गौर करने वाली बात है कि पॉप्लर पेड़ पांच से सात वर्षों में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं और इनकी लकड़ी की मांग प्लाईवुड, फर्नीचर तथा कागज उद्योग में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह किसानों के लिए स्थायी आमदनी का साधन बन सकता है। पर्यावरण को भी मिलेगा संबल, ग्रामीण विकास में नई दिशा पॉप्लर वृक्ष पर्यावरणीय संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये कार्बन अवशोषण में काफी सक्षम होते हैं। साथ ही मिट्टी में नमी बनाए रखते हैं। भूमि क्षरण रोकने में से काफी प्रभावी हैं। जिले में तेजी से घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए यह योजना पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित हो सकती है। क्या कहते हैं अधिकारी किसानों इसका लाभ उठाएं और निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करें। यदि यह योजना सफल होती हैं, तो आने वाले वर्षों में जिले की तस्वीर हरियाली से सराबोर दिखाई देगी। जहां खेतों के साथ-साथ किसानों की खुशहाली भी बढ़ेगी। यह योजना खेती और प्रकृति दोनों के लिए वरदान साबित होने की क्षमता रखती है। बस जरूरत है किसानों की सक्रिय भागीदारी की। - मेघा यादव, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी ।

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