23 ट्रैक्टर-23 ट्रॉली खरीदारी की बोर्ड व सशक्त ने नहीं किया प्रस्ताव पारित
सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता।शहरी क्षेत्र में डॉग कीडिंग पॉइंट बनाने का प्रस्ताव बोर्ड से पारित व संपुष्ट नहींशहरी क्षेत्र में डॉग कीडिंग पॉइंट बनाने का प्रस्ताव बोर्ड से पारित व संपुष्ट नहीं था। इस...

सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। नगर परिषद में सफाई के नाम पर राशि का बंदरबांट, वित्तीय अनियमितता व नियम को दरकिनार कर कार्य कराए जाने का मामला कोई नहीं बात नहीं है। एक बार फिर नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर मुखर होते जा रहा है। इसकी लौ अब उपर तक पहुंच चुकी है। विभागीय मंत्री व विभागीय सचिव से पूरे मामले की जांच कराते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। नप क्षेत्र की सफाई के लिए बोर्ड व सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति व संपुष्टि के नियमविरुद्ध तरीके से 23 ट्रैक्टर-ट्राली खरीदने, बड़े पैमाने पर डॉग कीडिंग पॉट व प्वाईंट की खरीदारी व सफाई कार्य के लिए आउट सोर्सिंग एजेंसी के चयन के लिए बिड व निविदा प्रकाशित की गई।
वहीं, नप के पूर्व ईओ के कार्यकाल में एक सफाई एजेंसी को एक करोड़ का भुगतान बिना काम कराए करने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। बहरहाल, बताया जा रहा कि नगर परिषद बोर्ड व सशक्त स्थायी समिति ने कभी भी 23 ट्रैक्टर, 23 ट्रॉली, डॉग कीडिंग पॉट खरीदारी का प्रस्ताव पारित नहीं किया है। यही नहीं इस कार्य पर खर्च होने वाली राशि की प्रशासनिक स्वीकृति बोर्ड या सशक्त स्थायी समिति ने नहीं दी। बावजूद, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने नियमों का सीधे तौर पर उल्लंघन करते हुए ट्रैक्टर, ट्राली, डॉग कीडिंग पॉट खरीदने के लिए नियम के विपरित बिड का प्रकाशन कराते हुए इन सामग्रियों की खरीदारी बाजार दर से अधिक कीमत पर अपने चहेते वेंडर से किया है। जबकि प्रावधान यह है कि नप बोर्ड व सशक्त स्थायी समिति की स्वीकृति व संपुष्टि के बिना कोई कार्य नहीं किया जा सकता न किसी कार्य के लिए कोई राशि खर्च की जा सकती है। इन सबके बावजूद स्वलाभ के लिए नियमविरुद्ध तरीके से इन कार्यों में राशि खर्च कर स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता को बढ़ावा दिया गया, जो कि संज्ञेय अपराध है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र की सफाई के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन में भी अनियमितता, फर्जीवाड़ा व सार्वजनिक धन के गबन का मामला उठा है। इस पूरे मामले को लेकर नगर परिषद की उप मुख्य पार्षद किरण गुप्ता ने नगर एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव व विभागीय मंत्री, मुख्य सचिव व प्रमंडलीय आयुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराते हुए दोषियों पर विधि-सम्मत कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच राज्य स्तर के किसी वरीय अधिकारी से कराने की बात कही गई है।
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