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किसानों को समय पर मिलेंगे प्रत्यक्षण और अनुदानित बीज

हिन्दुस्तान टीम,सीवानPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 07:10 PM
किसानों को समय पर मिलेंगे प्रत्यक्षण और अनुदानित बीज

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खेती-किसानी

जिला कृषि कार्यालय ने गेहूं समेत तमाम प्रत्यक्षण और अनुदानित बीजों का लक्ष्य के अनुरूप विभाग से डिमांड कर दिया है

एकीकृत बीजग्राम योजना के 300 क्विंटल गेहूं बीज की मांग

276 क्विंटल दस वर्ष से अधिक अवधि का प्रभेद बीज शामिल

11 हजार 721.20 क्विंटल गेहूं बीज का किया गया है डिमांड

45.28 क्विंटल अरहर व 98.52 क्विंटल मसूर बीज की मांग

सीवान/रघुनाथपुर। एक संवाददाता

रबी सीजन में शत-प्रतिशत बुआई का लक्ष्य पूरा करने को लेकर विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया है। सभी अपने काम में लगे हुए हैं। लेकिन, पंचायत चुनाव के कारण विभागीय अधिकारियों का बहुतेरे समय इसी कार्य में व्यतीत हो रहा है। बहरहाल, जिला कृषि कार्यालय ने गेहूं समेत तमाम प्रत्यक्षण और अनुदानित बीजों का लक्ष्य के अनुरूप विभाग से डिमांड कर दिया है। विभागीय से प्राप्त आंकड़े के अनुसार कुल 11 हजार 721. 20 क्विंटल बीज का डिमांड किया गया है। इसमें गेहूं के जीरोटिलेज की पद्धति वाले प्रत्यक्षण बीज 184.80 क्विंटल, फसल पद्धति के जीरो टिलेज बीज 74 क्विंटल और एनजीओ/संस्थान आधारित पद्धति के 24.80 क्विंटल गेहूं बीज की डिमांड की गयी है। जबकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत प्रमाणित 552 क्विंटल गेहूं बीज की डिमांड की गयी है। इसमें 276 क्विंटल दस वर्ष से अधिक अवधि का प्रभेद बीज शामिल है। राज्य योजना के अंतर्गत अनुदानित व प्रमाणित 9200 क्विंटल बीज की मांग की गयी है। इसमें 500 क्विंटल दस वर्ष से अधिक अवधि वाला प्रभेद बीज शामिल है। मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत 609.60 क्विंटल गेहूं बीज की मांग हुई है। जबकि एकीकृत बीजग्राम योजना के 300 क्विंटल गेहूं बीज की मांग हुई है।

खेसारी के प्रत्यक्षण बीज की भी हुई है डिमांड

सरकार किसानों को दलहनी फसल लगाने पर भी जोर दे रही है। सीमित क्षेत्रों में हो रही दलहनी फसल खेसारी के प्रत्यक्षण बीज की डिमांड जिला कृषि कार्यालय द्वारा की गयी है। प्राचीन समय से खेसारी किसान उगाते आ रहे हैं। इधर के कई दशकों से इसकी खेती जिले में नाम मात्र की हो रही है। बहरहाल, 15.04 क्विंटल खेसारी बीज की डिमांड की गयी है। जबकि अरहर की मांग की गई बीजों में प्रत्यक्षण के 3.28 क्विंटल की डिमांड हुई है। वहीं 36 क्विंटल अनुदानित दर की प्रमाणित बीज की मांग की गयी है। इसमें 6 क्विंटल 10 साल से अधिक अवधि के प्रभेद बीज शामिल हैं। मसूर के 12.36 क्विंटल बीज प्रत्यक्षण के और फसल आधारित पद्धति के 15.20 क्विंटल बीज की मांग की गयी है। मसूर के अनुदानित दर वाले बीजों में 14 क्विंटल 10 वर्ष से अधिक के अवधि वाले और 43 क्विंटल 10 वर्ष से कम अवधि के प्रभेद बीज की मांग हुई है। जबकि मूंग के कुल 32.32 क्विंटल बीज की मांग की गयी है। इसमें 4.32 क्विंटल प्रत्यक्षण बीज और 26 क्विंटल बीज अनुदानित दर वाले हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

डीएओ जयराम पाल ने कहा कि अनुदानित दर वाले बीजों का डिमांड कर दिया गया है। अनुदानित व प्रत्यक्षण बीज समय पर किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। सक्षम स्तर पर बीज का डिमांड किया जा चुका है।

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एक लाख 5 हजार क्विंटल गेहूं बीज की जरूरत

रघुनाथपुर। जिले में लक्ष्य के विरूद्ध गेहूं की बुआई के लिए कम से कम एक लाख 5 हजार क्विंटल गेहूं बीज की जरूरत पड़ेगी। गेहूं की बुआई के लिए 1 लाख 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र लक्ष्य के तौर पर निर्धारित किया गया है। विभाग की माने तो प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम यानि एक क्विंटल गेहूं का बीज बुआई के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि, कुछ लोग प्रति हेक्टेयर 110 से 120 किलोग्राम बीज का प्रयोग करते हैं। लेकिन, जिले को कुल 11 हजार 721.20 क्विंटल ही प्रत्यक्षण व अनुदानित बीज उपलब्ध होगा। ऐसे में बाकी के बीज किसान खुले बाजार से या घर के बीज का ही उपयोग किसान करेंगे। किसानों का कहना है कि प्रति हेक्टेयर मसूर की बुआई के लिए 40 किलोग्राम व खेसारी के लिए 80 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। 1640 हेक्टेयर क्षेत्र में मसूर की खेती के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जबकि अन्य दलहनी फसलों के लिए 270 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। इसी में खेसारी भी शामिल है।

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