
नीलगाय के आतंक से किसान परेशान, फसल बचाना बना चुनौती
बड़हरिया में महंगाई के इस दौर में किसान भारी लागत लगाकर खेती कर रहे हैं। नीलगायों के बढ़ते आतंक से सब्जी और गेहूं की फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान रात भर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली है। अगर नीलगायों की संख्या बढ़ती रही, तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
बड़हरिया, संवाददाता। महंगाई के इस दौर में किसान जहां भारी लागत लगाकर खेती कर रहे हैं, वहीं नीलगाय और घोड़पड़ास किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। क्षेत्र में नीलगायों के बढ़ते आतंक से सब्जी और गेहूं की फसलें लगातार बर्बाद हो रही हैं। कोमल हिस्सों को चर जाने से पैदावार पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे किसानों को लागत निकलने तक की चिंता सताने लगी है। रात होते ही फसलों पर धावा किसानों के अनुसार, चवर में पानी भरे रहने के कारण दिन में नीलगाय ऊंचे और खाली स्थानों पर चली जाती हैं, लेकिन रात होते ही झुंड बनाकर खेतों में घुस जाती हैं।
गेहूं के साथ-साथ बैगन, गोभी, बोरो, टमाटर सहित अन्य सब्जियों की फसल को नीलगाय भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। औषधीय खेती में लगे पौधों के कोमल हिस्से भी इनके शिकार बन रहे हैं। बढ़ती लागत, घटती पैदावार महंगे खाद, बीज और सिंचाई पर खर्च करने के बाद भी फसल सुरक्षित नहीं रह पा रही है। सावना, कैलगढ़, सुंदरपुर, हथीगाई, ज्ञानी मोड़, हलीम टोला, जगतपुरा और रसूलपुर गांवों में सब्जी की खेती को भारी नुकसान हुआ है। किसान रात-दिन पंप से पानी चलाकर और ठंड में जागकर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं। किसानों की पीड़ा सावना गांव के किसान आनंद कुमार, अर्जुन प्रसाद, मेराज आलम, दीपू कुमार और जेपी सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि नीलगाय झुंड बनाकर एक साथ खेत में घुस जाती हैं और पूरी फसल तहस-नहस कर देती हैं। आनंद कुमार ने बताया कि करीब दो एकड़ में गोभी, फूलगोभी, टमाटर और बैगन की खेती की गई थी, लेकिन नीलगायों ने फसल का कोमल हिस्सा खाकर भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन से गुहार किसानों का कहना है कि कई बार वन विभाग और वरीय अधिकारियों को नीलगाय पकड़ने और जंगली जानवरों से निजात दिलाने के लिए आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का डर है कि अगर नीलगायों की संख्या यूं ही बढ़ती रही, तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। महंगी खेती में मुनाफा तो दूर, नुकसान के सिवा कुछ हाथ नहीं लग रहा है।

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