Siwan News जिले में अब-तक सिर्फ 12 प्रतिशत ही हो सकी धान की रोपाई

हिन्दुस्तान, सीवान
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Siwan News सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। बारिश के चार दिन बाद किसानों ने धान की रोपनी शुरू कर दी है, लेकिन पानी की कमी के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में सामान्य वर्षापात 321.90 मिली लीटर ही रहा है, जिससे धान की रोपाई में तेजी नहीं आ रही। किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए बारिश की जरूरत है।

Siwan News जिले में अब-तक सिर्फ 12 प्रतिशत ही हो सकी धान की रोपाई

Siwan News सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में चार दिन की बारिश के बाद धान के खेत में पानी जमा हो गया है, इसके साथ ही धान की रोपनी शुरू हो गई है हालांकि अभी रोपनी में तेजी नहीं आई है, क्योंकि कई खेतों में पानी समान रूप से जमा नहीं होने व कुछ खेतों के पूरी तरह से तैयार नहीं होने से अभी भी रोपनी में अपेक्षित तेजी नहीं आ पाई है। दूसरी तरफ कई ऊंचे इलाके या वैसे खेतों में जहां बारिश का पानी पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच सका है, किसान पंपसेट व बिजली के मोटर से सिंचाई कर रहे हैं। जिले में जुलाई माह में सामान्य वर्षापात सिर्फ 321.90 मिली लीटर ही रहा है।

रोपाई की प्रगति

वहीं, जिले में खरीफ सीजन में एक लाख तीन हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई करनी है। चार दिनों की बारिश के बाद शनिवार तक लक्ष्य के अनुरुप 10 हजार 895 हेक्टेयर यानि कि 12 प्रतिशत धान की रोपाई कर ली गई है। वैसे किसान जो कि पहले अपने खेतों में धान का बिचड़ा डाले हैं, वही अभी मुख्य रूप से रोपाई का कार्य शुरू किए हैं, जिन्होंने देर से बिचड़ा डाला था, वह 20 जुलाई के बाद से रोपाई का कार्य शुरू करेंगे। जिला कृषि कार्यालय के अनुसार, तब जाकर धान की रोपाई में तेजी आयेगी। जिला कृषि पदाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि जिले में आवश्यकता के अनुरूप अभी बारिश नहीं हुई है, लेकिन चार दिनों की बारिश के बाद जो किसान पहले बिचड़ा गिरा दिए थे, उन्होंने धान की रोपाई शुरू कर दी है। मौसम अनुकुल रहा तो 20 जुलाई के बाद रोपाई में तेजी आयेगी। मौसम ने साथ नहीं दिया तो किसानों को पंपसेट, बिजली मोटर से सिंचाई कर धान की रोपनी करनी होगी। जिले में अबतक लक्ष्य के करीब 12 फीसदी धान की रोपनी हो चुकी है।

किसानों की चुनौतियां

धान की रोपाई के लिए अभी भी खेतों को नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी खेतों में धान का बिचड़ा शत-प्रतिशत गिराने के बाद अब धान की रोपनी में भी किसानों को मौसम साथ नहीं दे रहा। किसानों को पहले धान का बिचड़ा गिराने में मौसम की मार झेलनी पड़ी। जैसे-तैसे अब जबकि बिचड़ा तैयार हो रहा तो बारिश जरूरी है, जो कि पूरी नहीं हो पा रही। कारण कि खेतों को धान की रोपनी के लिये पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। खेती-किसानी के जानकारों का कहना है, धान के खेतों में करीब एक माह तक पानी लगा रहना चाहिये। धान की खेती के लिए सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि बारिश वाला मौसम भी जरूरी है, तभी उत्पादन अच्छी हो सकती है। मगर जिले में पर्याप्त बारिश नहीं हो रही है। ऐसे में किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ी हुई है।

फसल की स्थिति

चार दिनों तक कभी मूसलाधार तो कभी हल्की-फुल्की बारिश से धान के खेत व बोए गए पौधे को संजीवनी तो मिल रही है, लेकिन इतनी कम बारिश से धान का फसल तैयार होना बेहद मुश्किल जान पड़ता है। जुलाई के शुरूआती समय में अच्छी खासी बारिश होने के बाद किसानों ने खेतों में जैसे-तैसे कर धान की रोपनी तो कर रहे हैं, लेकिन अब जोरदार बारिश के इंतजार में किसान बैठे हैं। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो धान के फसल से कहीं हाथ न धोना पड़ जाएगा। किसान धनंजय यादव, अरविंद मांझी, सुग्रीव भगत, शशिभूषण सिंह, उमेश यादव आदि ने बताया कि धान की रोपनी का पिक आवर शुरू हो गया है, लेकिन अब-तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की रोपनी करने में काफी दिक्कतें आ रही है। चार दिनों की बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन आगे भी अगर मूसलाधार बारिश नहीं हुई तो धान की रोपनी में किसानों आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने कहा कि धान के पौधे को न सिर्फ पानी बल्कि पानी वाला मौसम भी चाहिए, तभी धान का उत्पादन अच्छा होगा।

सामान्य प्रश्न

किस क्षेत्र में धान की रोपनी की जा रही है?
जिले में धान की रोपनी की जा रही है।
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