
पानी में गिरने के चलते धान में 25 से 30 प्रतिशत नमी बढ़ी
संक्षेप: फोटो- 06ने जहां एक ओर किसानों की धान की फसल को बर्बाद कर दिया। वहीं अब जब कटनी का समय आया, तो खेतों में जलजमाव ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अधिकांश खेतों में पानी अभी तक निकला नहीं है। इससे...
फोटो- 06 कैप्शन- हसनपुरा प्रखंड में खेत गिरी धान की फसल। - भारी बारिश से डूबे खेतों में अब धान कटनी की चुनौती, जलजमाव और नमी से परेशान किसान - किसानों के सामने अब धान बचाने से लेकर बेचने तक की खड़ी हुई गंभीर समस्या - धान की बालियों में अधिक नमी के कारण अब फसल की गुणवत्ता पर असर ग्राफिक्स 18 एमटी के करीब अब तक जिले में हो पाई धान की खरीद 10 दिन हो गए अब तक खरीदारी के रफ्तार नमी के चलते धीमा सीवान, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। पिछले दिनों हुई लगातार भारी बारिश ने जहां एक ओर किसानों की धान की फसल को बर्बाद कर दिया।

वहीं अब जब कटनी का समय आया, तो खेतों में जलजमाव ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अधिकांश खेतों में पानी अभी तक निकला नहीं है। इससे धान काटने के लिए मशीनें या मजदूर दोनों ही नहीं जा पा रहे हैं। किसानों के सामने अब फसल बचाने से लेकर बेचने तक की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। जिले के कई प्रखंडों में आंदर, हुसैनगंज, गोरेयाकोठी, दरौली और महाराजगंज में हजारों एकड़ खेतों में पानी जमा है। किसान हाथों से कटाई करने को मजबूर हैं, पर गीली जमीन और दलदल जैसी स्थिति में काम कर पाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। खेतों में धान के पौधे गिर चुके हैं, इससे कटाई में दोगुना समय और खर्च लग रहा है। किसानों का कहना है कि धान की बालियों में अधिक नमी के कारण अब फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। जो धान पक चुका था, वह पानी में सड़ने लगा है, और जो बचा है, उसमें नमी का स्तर 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। नमी के चलते धान खरीदारी की नहीं बढ़ रही रफ्तार एक नवंबर से जिले में धान की खरीदारी शुरू हो गई है। लेकिन, केंद्रों पर ऐसे धान की खरीद नहीं हो रही है, क्योंकि नियमों के अनुसार 17 प्रतिशत से अधिक नमी वाले धान को अस्वीकार कर दिया जाता है। इस स्थिति से परेशान किसान अब निजी खरीदारों की ओर रुख कर रहे हैं, जो मौके का फायदा उठाकर कम कीमत पर फसल खरीद रहे हैं। कई किसानों ने बताया कि उत्पादन लागत भी पूरी नहीं निकल पा रही है। अब 10 दिनों में अब तक जिले में मात्र 18 एमटी ही धान की खरीदारी हो पाई है। पंपसेट चलाकर धान के खेत में पानी निकालने को किसान मजबूर जिले में कई जगह किसान धान की फसल के साथ रबी की बुआई का समय न बीत जाए। इसको लेकर अपने निजी पंपसेट को चलाकर खेत से पानी निकाल रहे हैं। इससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान बताते हैं कि डीजल के दामों में बढ़ोतरी के कारण खेतों से पानी निकालने में भी दिक्कत हो रही है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि जहां संभव हो, वहां पंप सेट से जल निकासी करें और धान की फसल को खुले व हवादार स्थान पर सुखाने की कोशिश करें। नमी के चलते सर क्या कहते हैं अधिकारी जिले में धान की खरीदारी एक नवंबर से शुरू हो गई है। लेकिन धान में नमी के कारण खरीदारी की रफ्तार धीमी है। मौसम ठीक हो रहा है, किसान धान खेत से कटनी के बाद सूखा रहे हैं। एक सप्ताह बाद खरीदारी में तेजी आने की संभावना है। सौरभ कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, सीवान

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