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जिले में धान के पैदावार में 30 फीसदी की कमी का अनुमान

रघुनाथपुर, एक संवाददाता।। एक तरफ सूखे की वजह से किसान संकट में थे, दूसरी तरफ कीट-पतंगों व खरपतवार की वजह से जिले भर के किसान परेशान रहे। इन परिस्थितियों की वजह से इस साल भी पिछले तरह धान के पैदावार...

जिले में धान के पैदावार में 30 फीसदी की कमी का अनुमान
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,सीवानWed, 01 Nov 2023 02:00 PM
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रघुनाथपुर, एक संवाददाता।
जिले में इस साल धान की फसल को भीषण सुखाड़ का सामना करना पड़ा है। किसानों को इस साल दोहरी मार झेलनी पड़ी है। एक तरफ सूखे की वजह से किसान संकट में थे, दूसरी तरफ कीट-पतंगों व खरपतवार की वजह से जिले भर के किसान परेशान रहे। इन परिस्थितियों की वजह से इस साल भी पिछले तरह धान के पैदावार में 25 से 30 फीसदी तक की कमी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। जिन किसानों ने धान की सिंचाई नहीं कि थी अब मुगार (मुआर) काटने को विवश हैं। जिले में इस साल 93 हजार 753 हेक्टेयर क्षेत्र में धनरोपनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसानों ने जैसे-तैसे रोपनी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल तो कर लिया, लेकिन सूखे की वजह से किसानों को भारी खर्च उठाना पड़ा। धान का बिचड़ा डालने से लेकर खाद डालने तक में किसानों को अधिक खर्च करने पड़े। हर नक्षत्र में बारिश भी काफी कम हुई है। इस वजह से धान की बालियां अपेक्षानुसार हृष्ट-पुष्ट नहीं हो सकी। वहीं धान की बालियों में गंधी और अन्य हानिकारक कीट का प्रकोप भी देखा गया। हालांकि, इस साल बालियों में हल्दिया रोग लगने की शिकायत नहीं मिली है। इधर, किसानों को सिंचाई पर लागत खर्च ज्यादा होने से बहुतेरे किसानों ने तो अपने फसल की सिंचाई नहीं कर पाए। फलतः पछात की कौन कहे आगत किस्म के भी धान की फसल पर इसका बुरा प्रभाव पड़ गया है। क्षेत्र में उन्हीं किसानों के धान कुछ ठीक है, जिन्होंने तीन से चार बार सिंचाई की है।

सितंबर में भी सामान्य से कम हुई बारिश

किसानों का स्पष्ट मानना है कि इस साल जुलाई-अगस्त में कम बारिश के कारण जिले में धान की उपज में लगभग 30 प्रतिशत गिरावट आएगी। सितंबर महीने में भी सामान्य से कम ही बारिश हुई। जिसके कारण धान के खेत में न तो कभी दो-चार दिन के लिए पानी लगा और न ही पर्याप्त नमी ही रही। इस साल जून में मानसून भी देर से ही पहुंचा। जिसके चलते किसानों को अपना बिचड़ा बचाने के लिए तीन-चार बार सिंचाई करनी पड़ी। जून से अगस्त तक जिले में 60 प्रतिशत से कम ही बारिश हुई है।

सूखे की भेंट चढ़ गया है कृषि फार्म के धान

किसानों के धान की फसल तो सूखे की भेंट चढ़ ही गई है। धान की फसल से पानी के अभाव में बालियां तक ठीक से निकल ही नहीं पाई है। इस वजह से धीरे-धीरे पौधे मुरझाते हुए अब सूखने लगे हैं। किसान इसे मुआर होना बता रहे हैं। जिसे पशु चर रहे हैं और किसान चारा के काम में उपयोग किया जा रहा है। अग्रणी किसान रामेश्वर सिंह, प्रभुनाथ प्रसाद और बलिंद्र प्रसाद ने कहा कि पिछले साल की ही तरह इस साल भी धान का पैदावार पर मौसम का मार पड़ गया।

पछात किस्म के धान में कम दिख रही बालियां

किसानों द्वारा लगाई गई आगत किस्म के धान की फसल में तो बालियां दिख भी रही है, पछात किस्म की फसल में बहुत कम बालियां नजर आ रही हैं। जिले में पछात किस्म में सोना मंसूरी, सोनम और स्वर्णा आदि की रोपनी किसान किये हुए हैं। तीन से चार बार की सिंचाई के बावजूद फसल अच्छी नहीं हुई है।

गंडक नहर भी किसानों का नहीं बनी सहारा

सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए इस साल गंडक नहर भी सहारा नहीं बन सकी। हालांकि, जिले के कुछेक इलाकों में पानी नहर में जरूर पहुंचा। लेकिन, अधिकांश हिस्में पानी पहुंचा तक नहीं। किसान शिकायत करते-करते थक गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। परिणामतः नहर वाले हिस्से में भी इस साल धान की फसल अच्छी नहीं हो सकी।

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