उपेक्षा से जूझ रहा दुग्ध उत्पादन, शुद्ध दूध पर संकट के आसार
सीवान में दुग्ध उत्पादन की स्थिति गंभीर हो गई है। बढ़ती लागत, गाय-भैंस की कीमतों में वृद्धि और उचित मूल्य न मिलने से किसान परेशान हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा और पशु चिकित्सकों की कमी भी समस्याएं बढ़ा रही है। सरकार से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

सीवान। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला दुग्ध उत्पादन इन दिनों गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। वर्षों से दूध उत्पादन पशुपालक किसानों के जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन रहा है, लेकिन अब बढ़ती लागत और घटते मुनाफे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गाय-भैंस की कीमतों में लगातार वृद्धि, चारा और दवा के बढ़ते खर्च के बावजूद दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में शुद्ध दूध की किल्लत हो सकती है। किसानों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें सहजता से नहीं मिल पाता।
जटिल प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं के कारण अधिकांश पशुपालक योजना से वंचित रह जाते हैं। कुछ मामलों में बिचौलियों की भूमिका भी सामने आती है, जिससे अनुदान का लाभ सही किसानों तक नहीं पहुंच पाता। सरकारी योजना पशु शेड निर्माण की योजना है, लेकिन प्रखंड कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद भी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। सिसवन और चैनपुर में प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय होने के बावजूद पशु चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति नहीं रहती। कई जगहों का प्रभार एक ही चिकित्सक के पास होने से समय पर उपचार नहीं मिल पाता। अस्पतालों में दवाओं की कमी भी गंभीर समस्या बनी हुई है। दुधारू पशुओं की कीमत में बेतहाशा वृद्धि से किसानों की संख्या घट रही है। महंगे दाम पर पशु खरीदने के बाद यदि बीमारी या महामारी से उसकी मौत हो जाए, तो मुआवजा नहीं मिल पाता। पशु बीमा की सुविधा भी कागजों तक सीमित रह जाती है। जागरूकता कार्यक्रमों के अभाव में किसान गंभीर बीमारियों से बचाव के उपायों से अनभिज्ञ रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशु बीमा की प्रक्रिया सरल बनाई जाए, अनुदान पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाए और मनरेगा के तहत पशु शेड निर्माण सुनिश्चित हो, तो दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। समय की मांग है कि सरकार और संबंधित विभाग समन्वित प्रयास कर पशुपालकों को राहत दें, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। शिकायत- 1. गाय-भैंस की खरीद पर असानी से ऋण एवं अनुदान नहीं मिल पाता है 2. पशुओं की बीमारी से मौत के लिए मुआवजा नहीं मिलता है 3. पशु चिकित्सालयों में चिकित्सकों की कमी और समुचित दवाएं उपलब्ध नहीं रहती हैं 4. पशु बीमा का लाभ पशुपालक किसानों को नहीं मिल पाता है 5. पशु शेड निर्माण के लिए अनुदान आसानी से नहीं मिलता है सुझाव- 1. बैंको से पशु खरीदारी के लिए ऋण व दान सभी किसानों को आसानी से मिलना चाहिए 2. गंभीर बीमारी या महामारी से पशु की मौत किसानों को मुआवजा का प्रावधान होना चाहिए 3. प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में नियमित चिकित्सक व दवा की उपलब्धता रहनी चाहिए 4. सरकार की ओर से सभी किसानों के मवेशियों का मुफ्त पशु बीमा का लाभ मिलना चाहिए 5. सभी जरूरतमंद किसानों को पशु शेड निर्माण के लिए अनुदान की राशि स्वीकृत होनी चाहिए
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