फार्मर आईडी बनाने की रफ्तार धीमी
भगवानपुर हाट, एक संवाददाता। नीलगाय से फसलें तबाह , किसान बेहालनीलगाय से फसलें तबाह , किसान बेहालनीलगाय से फसलें तबाह , किसान बेहाल

भगवानपुर हाट, एक संवाददाता। प्रखंड में जमाबंदी रैयत के नाम से फार्मर आईडी बनाने के महा अभियान में कई समस्याएं आ रही हैं। इसके कारण इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए तमाम कर्मियों की प्रतिनियुक्ति के बावजूद फार्मर आईडी बनाने की रफ्तार काफी धीमी है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि करीब 80 से 85 प्रतिशत जमाबंदी रैयतों की मृत्यु हो चुकी है और उनके वंशजों में जमाबंदी का बंटवारा नहीं हो पाया है। इस कारण मृत पिता या दादा के नाम पर जमाबंदी होने के कारण उनके वंशजों के नाम से फार्मर आईडी नहीं बन पा रहा है। दूसरी समस्या यह है कि करीब 15 से 20 प्रतिशत जीवित रैयतों के नाम जमाबंदी तो चल रही है कि लेकिन उनके नाम आधार कार्ड से मैच नहीं नहीं हो रहा है।
इस कारण मिस मैचिंग होने के कारण भी फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है। तीसरी समस्या यह है कि अधिकांश रैयतों के ऑनलाइन जमाबंदी में खाता नंबर व रकबा तो अंकित है लेकिन खेसरा नंबर अंकित है। वहीं अगर एक खाता नंबर में एक से अधिक खेसरा नंबर है तो हरेक खेसरा नंबर का रकबा अंकित नहीं है। एक से अधिक खेसरा का कुल रकबा अंकित है। इस कारण किस खेसरा का कितना रकबा है, स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इससे अभी तक जितने जीवित रैयत हैं उनमें से करीब 30 प्रतिशत रैयतों का हीं फार्मर आईडी बन पाया है। इस मामले में सीओ धीरज कुमार पांडेय ने बताया कि फार्मर आईडी बनाने के लिए कृषि विभाग के कर्मियों, कर्मचारी, पंचायत सचिव व अन्य कर्मियों को लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जिनके नाम से जमाबंदी है, उन्हीं का फार्मर आईडी बनेगा।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


