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तीसरी सोमवारी को लेकर मेहंदार में जुटने वाली भीड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट

सिसवन, एक संवाददाता जलार्पण के लिए बाबा के गर्भ गृह में अरधा लगाया गया है। 23 जुलाई से ही महिलाएं व पुरुष अलग अलग अरघा के जरिए जलार्पण कर रहे है। पहली सोमवारी पर हुए हादसे के बाद से अरधा सिस्टम लागू...

 तीसरी सोमवारी को लेकर मेहंदार में जुटने वाली भीड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,सीवानMon, 01 Aug 2022 11:50 AM
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सिसवन, एक संवाददाता

सावन की तीसरी सोमवारी पर बाबा महेंद्रनाथ मंदिर मेहंदार में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। भीड़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है। रविवार की देर शाम से ही महेंद्रनाथ मंदिर हर-हर महादेव व बोल बम के नारों से गुजमान रहेगा। आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जलार्पण के लिए बाबा के गर्भ गृह में अरधा लगाया गया है। 23 जुलाई से ही महिलाएं व पुरुष अलग अलग अरघा के जरिए जलार्पण कर रहे है। पहली सोमवारी पर हुए हादसे के बाद से अरधा सिस्टम लागू किया गया। प्रशासन श्रद्धालुओं को कतार बद्ध होकर मंदिर में भेजगे। कमलदाह सरोवर में श्रद्धालुओं के स्नान करने के बाद आस्था के लोटे में पवित्र जल लेकर कतारबद्ध होकर मंदिर के पट खुलने का इंतजार नही करेगे। प्रशासन द्वारा मंदिर के मुख्य गेट को 24 घंटे के लिए खुला रखा गया है। कुछ समय के लिए मंदिर का गर्भगृह बंद हो रहा है। श्रद्धालु आधी रात के बाद जब चाहे जल चढा सकते हैं।

बीडीओ सूरज कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लाइटिंग, पेयजल इत्यादि की व्यवस्था की गई है। रात्रि में दूरदराज व उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु मंदिर के पश्चिम और उत्तर दिशा की ओर बनाए गए बरामदा व अन्य धर्मशालाओं में शरण ले रहे हैं। मंदिर के आगे का पूरा इलाका खाली है। कमलदाह सरोवर में पुरुष और महिलाओं के स्नान के बाद कतार में लगना शुरू हो जा रहा है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नही हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।

दंडाधिकारी व सुरक्षा बल के जवान रहेंगे तैनात

मेला क्षेत्र में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और सुरक्षा बल के जवान देर रात से ही अपने कर्तव्य स्थल पर उपस्थित होकर श्रद्धालुओं की सेवा करते रहेंगे। सुरक्षा बल के जवान श्रद्धालुओं को कतार में करने के कार्य में लगाए गए हैं। श्रद्धालु सुगमतापूर्वक बाबा को जलार्पण कर सके इसे सुनिश्चित कराएगे। 13 स्थानों पर लगभग 25 मजिस्ट्रेटो की नियुक्ति की गई है। तीन मजिस्ट्रेट के ऊपर एक वरीय मजिस्ट्रेट की भी तैनाती की गई है। छह थानों के थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ तैनात रहेंगे। इसके अलावा जिला से भी महिला और पुलिस बल की तैनाती हुई है। मेले में एसडीओ रामबाबू बैठा व एसडीपीओ जितेंद्र पांडेय भी निरीक्षण करेंगे।

सोहगरा में तीसरी सोमवारी को लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की होगी भीड़

गुठनी, एक संवाददाता।

प्रखंड के मशहूर धार्मिक स्थलों में से एक बाबा हंसनाथ मंदिर में तीसरे सोमवार को आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए रविवार की देर शाम बैठक की गयी। इस दौरान स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति आने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए भी रूपरेखा तैयार कर ली। इस संबंध में सीओ शंभूनाथ राम ने बताया कि आने वाले लोगों को मुख्य मार्ग से पैदल ही मंदिर के मुख्य गेट तक आना पड़ेगा , इसके लिए सभी मुख्य द्वार पर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। वहीं भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिले से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है। जिसमें महिला पुलिस बल की अधिकता रहेगी। जिनमें प्रमुख रूप से मंदिर की साफ सफाई, मंदिर परिसर में रोशनी की व्यवस्था, शौचालय की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, जलपान की व्यवस्था और सीसीटीवी फुटेज प्रमुख है। वही मंदिर समिति ने भी तीसरी सोमवारी को लेकर युवाओं संग बैठक किया है। जानकारी के अनुसार इस बार गोरखपुर, देवरिया, लार, सलेमपुर, बलिया, सिकंदरपुर, गाजीपुर, भाटपार, भटनी, सीवान, छपरा, गोपालगंज जिले से लोगो के आने की संभावना है। सीओ शंभूनाथ राम ने बताया की मजिस्ट्रेट जैसे नियुक्त हुए थे। वही और उसी जगह तैनात किए जायेंगे। उनमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हम सभी तैयारियों को लेकर पूर्ण रूप से आश्वस्त हैं।

सिसवन के नागेश्वर महादेव पूरा करते हैं सबकी मनोकामनाएं

लगभग तीन सौ साल पुराना है छोटा शिवलिंग

रुद्राभिषेक से सभी मनोकामनाएं होती हैं पूरी

फोटो-11. सिसवन गांव स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर।

सिसवन, एक संवाददाता।

जिला मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर सिसवन गांव के पूरब टोला मुहल्ले में स्थित नागेश्वर महादेव सभी मनोकामनाएं को पूरी करते हैं। मंदिर के प्रति शिवभक्तों का अटूट विश्वास, श्रद्धा व आस्था जुड़ा हुआ है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक व पूजा-अर्चना करने वालों की हर मनोकामना पूरी होती है। सावन महीने में पूजा अर्चना करने आने वाले श्रद्धालु की भीड़ जुट रही हैं। प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर संकीर्तन का आयोजन होता है। मंदिर में दो शिवलिंग स्थापित है। जिनमें से एक शिवलिंग लगभग 300 वर्ष पुराना है। मंदिर के पुजारी पारसनाथ तिवारी ने बताया कि लगभग 300 वर्ष पूर्व वासुदेव तिवारी सरयू नदी में स्नान करने गए थे। उसी दौरान उन्हें नदी से शिवलिंग मिली। उन्होंने गांव के मध्य दक्षिण दिशा में उसकी स्थपना की। वहां पर उत्तर प्रदेश के विष्णु सिंह ने छोटा सा मंदिर बनवाया। आज भी उस घाट को शिवाला घाट के नाम से जानते हैं। लंबे समय तक वहां सिर्फ शिवलिंग की स्थापना थी। मंदिर में किसी भी देवी देवता की स्थापना नहीं थी। 1954 में उत्तर प्रदेश के चकिया निवासी व गांव की बेटी राजमुनी देवी ने इस मंदिर में पार्वती और गणेश की प्रतिमा की स्थापना की। तब से मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं के हर मनोकामना पूर्ण होती है।

1958 में बना नया मंदिर

1957 में सरयू नदी के कटाव में मंदिर पानी में विलीन हो गया। रात्रि में होने वाले कटाव को देखकर ग्रामीणों ने शिवलिंग, माता पर्वती व गणेश की प्रतिमा को लाकर केदारनाथ तिवारी के द्वार पर स्थापित किए। एक साल बाद 1958 में वहां पर मंदिर बनाई गई। जिसमें पुराने शिवलिंग हुआ व नए शिवलिंग की स्थापना की गई। नए शिवलिंग का नाम ही नागेश्वर महादेव रखा गया। जिनके रुद्राभिषेक, जलाभिषेक करने से हर मनोकामना की पूर्ति होती है। हर शिवरात्रि पर यहां महिलाओं की काफी भीड़ जुटती है।

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