सीवान में तिरंगा यात्रा के दौरान अफरातफरी, बेहोश होकर गिरने लगीं छात्राएं; 100 अस्पताल में भर्ती
सीवान जिले के भगवानपुर में गुरुवार को तिरंगा यात्रा के दौरान एक स्कूल की सैकड़ों छात्राएं बीमार हो गईं। छात्राएं एक-एक कर बेहोश होकर गिरने लगीं। करीब 100 छात्राओं को अस्पताल पहुंचाकर इलाज कराया गया।

विनय श्रीवास्तव, भगवानपुर। बिहार के सीवान जिले में गुरुवार को स्कूली बच्चों की तिरंगा यात्रा के दौरान हड़कंप मच गया। तिरंगा यात्रा में शामिल एस एस हाई स्कूल सह इंटर कॉलेज की सैकड़ों छात्राओं की तबीयत खराब हो गई। आनन-फानन में तिरंगा यात्रा को समाप्त कर दिया गया। तिरंगा यात्रा जब स्कूल वापस लौटी तो छात्राएं एक-एक कर बेहोश होकर गिरने लगीं। इससे विद्यालय परिसर में अफरातफरी मच गई। तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में करीब 100 छात्राओं को भर्ती कर इलाज किया गया।
स्कूल से लगातार एंबुलेंस को आता-जाता देख आसपास के लोग भी सहम गए। भगवानपुर स्वास्थ्य केंद्र में करीब 100 छात्राएं पहुंच गईं। इतनी संख्या में मरीजों को देख अस्पताल में भी अफरातफरी का माहौल बन गया। जिसे जहां जगह मिली, वहीं पर उसका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल के सभी वार्ड, कमरे, बरामदे, यहां तक कि एक्सरे रूम और ऑपरेशन थियेटर में छात्राओं को रखकर इलाज किया गया।
बीडीओ समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे
अस्पताल के सभी कर्मी इलाज में सहायता करने में जुट गए। हालांकि, अस्पताल की क्षमता से अधिक मरीजों के आ जाने से सभी हलकान रहे। प्रखंड प्रमुख हरेंद्र पासवान, बीडीओ प्रियंका कुमारी, सीओ धीरज कुमार पांडेय, बीईओ राकेश कुमार, स्कूल के शिक्षक, थाना के एसआई दुर्गा प्रसाद यादव, पुलिस बल, अस्पताल के गार्ड सभी अस्पताल पहुंच बेहोश हुई बच्चियों को संभालने में जुटे रहे। कुछ छात्राएं मामूली इलाज के बाद ठीक हो गईं, जबकि कुछ को भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
अभिभावक दौड़े-दौड़े अस्पताल पहुंचे
बच्चियों की तबीयत बिगड़ने की खबर सुन उनके अभिभावक भी अस्पताल पहुंच गए। कई अभिभावक स्कूल प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने लगे।
उमस और धूप से हालत खराब हुई, 15 बच्चियों की हालत चिंताजनक
अभिभावकों का कहना है कि किसी ने उमस भरी गर्मी और धूप जैसे मौसम का ख्याल नहीं किया। तेज धूप और उमस के कारण बच्चियां लगातार बेहोश होने लगीं। अस्पताल में भर्ती करीब 15 बच्चियों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।


