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20 सितम्बर, 2020|3:24|IST

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प्रवासी मजदूरों के सामने है रोटी व कपड़ा की समस्या

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लॉकडाउन के बाद सबसे बड़ी समस्या मजदूरों के सामने खड़ा हो गया है। लाक डाउन के बाद फैक्ट्री व कल-कारखाना बंद हो गया। विभिन्न प्रदेशों में कमाने गए प्रवासी मजदूरों की रोजीरोटी पर आफत आ गई है। प्रतिदिन कमाने खाने वाले मजदूरों को परिवार की चिंता सताने लगी। दिल्ली, छतीसगढ़, हरियाणा, यूपी, नेपाल से पैदल चल कर गांव आने वाले मजदूर सीताराम साह, कैलाश सिंह, मो. कादिर आदि ने बताया कि लॉकडाउन के कारण भुखे रहना पड़ा। कुछ परिवार के साथ कई वर्षो से वहीं रह रहे थे । बताया कि खाना लेने के लिए कई-कई घंटा लाईन में लगे रहने के बाद दाल-चावल, सब्जी मिला हुआ एक बड़ा कलछुन से एक कलछुन मिलता । इसके बाद गांव के लिए चल दिये । दिल्ली से गाजियाबाद पैदल, गाजियाबाद से लखनऊ ट्रक से पहुंचा। वहां से गोरखपुर पैदल, गोरखपुर से यूपी सरकार गोपालगंज बोर्डर तक पहुंचाया। वहां से पैदल गांव पहुंचा । जहां 14 दिन क्वारेंटाइन में रहने के बाद घर आया। गांव में मजदूरी मिलने पर यहीं मजदूरी करने का निर्णय लिया है। लेकिन, यहां भी काम नहीं मिल रहा है। लॉकडाउन समाप्त के बाद उसी फैक्ट्री व कंपनी में काम मिलेगा । इसकी कोई गारंटी नहीं है ।

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  • Web Title:The problem of bread and cloth is in front of migrant laborers