जानकी का डोला निकला, लगे जयकारे
सीतामढ़ी में श्री जानकी जी की डोला का धार्मिक यात्रा निकाली गई। डोली 7 अप्रैल को श्री जानकी प्राकटय स्थल से शुरू हुई। भक्तों एवं संतों ने जगह-जगह फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। आरती, पूजन और भजन-कीर्तन के बाद महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। यह परिक्रमा मिथिला की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सीतामढ़ी। श्री सीतामढ़ी धाम से श्री जानकी जी की डोला पुजारी त्रिभुवन द्विवेदी के सानिध्य में संत, महंत एवं भक्तों के साथ निकाली गई। डोली 7 अप्रैल को श्री सीतामढ़ी धाम श्री जानकी प्राकटय स्थल रजत द्वार जानकी मंदिर, उर्विजा कुंड से चलकर सीताराम नाम का जय घोष करते निकली थी। यह डोला ढांगर गांव पहुंची जहां पर श्री राम जानकी मठ के महंत रामबाबू दास द्वारा जगह-जगह फूलों की वर्षा करके स्वागत किया गया। रात्रि में आरती पूजन, भजनकीर्तन के बाद महाप्रसाद की व्यवस्था की गयी। सीताराम संकीर्तन करते हुए जय सियाराम का जय घोष करते हुए डोला आगे निकली।
परशुरामपुर में पहुंचने पर आरती पूजन हुआ। इस धार्मिक यात्रा में क्षेत्र के संत महंत महिला भक्त श्रद्धालु एवं बड़ी संख्या में भक्त लोग शामिल हुए। परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह भक्तों ने फूलों की वर्षा कर डोली का भव्य स्वागत किया जा रहा है। श्री जानकी जन्मभूमि कि यह परिक्रमा मिथिला की प्राचीन धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है,पवित्र मन से इस परिक्रमा को जो करता है उसे मन वांछित फल की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख शांति प्राप्त होती है। परिक्रमा में चित्रकूट से आए हुए महंत राघव दास महाराज, बद्रीनाथ जी महाराज, महंत कृष्णानंद गिरी जी महाराज, सीताराम दास ,लक्ष्मण दास जी,रामकरण दास, नंदलाल दास, खिलावन दास, राम सागर दास, संतोष आनंद वैष्णव दास, साध्वी कल्पना, सीताराम दास, परमेश्वर लाल दास आदि शामिल हुए।
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