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23 सितम्बर, 2020|9:45|IST

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पेट की खातिर कोई काम कर रहे मजदूर

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कोरोना वायरस संक्रमण संकट के बाद लॉकडाउन के बीच बाहर से बड़ी संख्या में मजदूर अपने अपने गांव पहुंचे हैं। दिल्ली, राजस्थान, मुम्बई व अन्य शहरों से नौकरी व काम काज छोड़कर पहुंचे इन मजदूरों का अचानक अब काम बदल गया है। मजदूरों का कामकाज व मजदूरी करने का तरीका भी बदल चुका है। हुनरमंद मजदूरों व कामकाजी लोगों को अब गांव में मिट्टी कटाई और गेहूं कटनी तक करना पड़ रहा है। अपना और अपने परिवारों का भरण पोषण करने के लिए मजदूरी में जुट गए है। इन्हें परिवारों का जीवन यापन करने के अलावे बच्चों को पढ़ाने की चिंता भी सताने लगी है। शहरों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे को फिर गांवों के स्कूलों में ही भर्ती करके पढ़ना लिखना पड़ेगा। बाहर से पहुंचे राघो महतो, किशोरी महतो, सुरेश साह, विरेन्द्र, अशोक आदि ने बताया कि दिल्ली व राजस्थान में डिलेवरी बॉय, कुकिंग, क्लीनिंग एवं होटल में काम करते थे। अब घर पर मजदूरी व अन्य काम करना पड़ रहा है। विते एक महीने से आर्थिक संकट से भी जूझ रहे हैं। कबतक यह स्थिति रहेगी पता नही चल रहा है। बाहर के मकान मालिक के मकान का किराया भी बांकी है। जिसे चुकता करना है। वहां से फोन भी आता रहता है जिससे चिंता खायी जा रही है। मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन में जीविकोपार्जन के लिए कोई न कोई काम तो करना ही पड़ेगा। अब तो गेंहू की कटाई लगभग समाप्त हो गई है। दूसरा कार्य भी नहीं मिल रहा है।

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  • Web Title:Laborers doing some work for the sake of stomach